घुमारवीं: बस में मिले ₹10 हजार लौटाकर चालक और परिचालक ने जीता लोगों का दिल
घुमारवीं: बस में मिले ₹10 हजार लौटाकर चालक और परिचालक ने जीता लोगों का दिल

Post by : Himachal Bureau

July 11, 2026 6:08 p.m. 315

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र से ईमानदारी और मानवता की एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। ऐसे समय में जब अक्सर खोया हुआ सामान या नकदी वापस मिलने की उम्मीद कम ही की जाती है, वहीं एक निजी बस के चालक और परिचालक ने अपनी सच्चाई और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए बस में मिले दस हजार रुपये बिना किसी लालच के उनके असली मालिक को लौटा दिए। इस सराहनीय कार्य की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है। लोगों का कहना है कि इस तरह के कार्य समाज में विश्वास और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।

यात्रा के दौरान बस में छूट गए थे रुपये

जानकारी के अनुसार सरकाघाट से घुमारवीं की ओर आ रही कृष्णा निजी बस में यात्रा कर रहे एक यात्री के दस हजार रुपये अनजाने में बस के भीतर ही गिर गए। यात्रा समाप्त होने के बाद जब बस की नियमित जांच और सफाई की जा रही थी, तब चालक अशोक शर्मा और परिचालक अभिषेक की नजर नकदी पर पड़ी।दोनों कर्मचारियों ने पैसे अपने पास रखने के बजाय उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा और तुरंत यह पता लगाने का प्रयास शुरू किया कि यह रकम किस यात्री की है। उन्होंने बस में यात्रा करने वाले लोगों से जानकारी जुटाई और आपसी संपर्क के माध्यम से नकदी के वास्तविक मालिक तक पहुंचने का प्रयास किया।

पूरी रकम सही सलामत लौटाकर पेश की मिसाल

लगातार प्रयासों के बाद बस कर्मचारियों ने संबंधित यात्री का पता लगा लिया। संपर्क होने पर उसे बुलाकर पूरे दस हजार रुपये सुरक्षित लौटा दिए गए। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर यात्री भावुक हो गया और चालक व परिचालक का दिल से आभार व्यक्त किया।यात्री ने कहा कि आज के समय में ऐसी ईमानदारी बहुत कम देखने को मिलती है। उसने दोनों कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह कार्य दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

यूनियन पदाधिकारियों ने की सराहना

इस अवसर पर निजी बस चालक यूनियन के प्रधान अनिल कुमार सहित कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। उन्होंने चालक और परिचालक के इस कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही उनके सामान और कीमती वस्तुओं की सुरक्षा करना भी बस कर्मचारियों की नैतिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि यदि किसी यात्री का सामान या नकदी बस में छूट जाती है तो उसे सुरक्षित लौटाना प्रत्येक कर्मचारी का कर्तव्य है। इस घटना ने यह साबित किया है कि जिम्मेदारी और ईमानदारी आज भी समाज में जीवित है।

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समाज के लिए बना प्रेरणादायक संदेश

घुमारवीं की यह घटना केवल रुपये लौटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देती है कि सच्चाई, विश्वास और मानवता जैसे मूल्य आज भी लोगों के दिलों में मौजूद हैं। ऐसे कार्य न केवल आम लोगों का भरोसा बढ़ाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी ईमानदारी का महत्व समझाते हैं।स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों का इसी तरह ईमानदारी से पालन करे, तो समाज में विश्वास और पारदर्शिता की भावना और अधिक मजबूत होगी।

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