Author : Rajesh Vyas
हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के डिडवीं टिक्कर में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के सम्मान में एक भव्य और ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन जनसेवक सुशील ठाकुर की पहल पर संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 700 पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई। इतनी बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों का एक साथ एकत्र होना अपने आप में इस कार्यक्रम को विशेष और यादगार बना गया।
यह समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह देशभक्ति, त्याग, बलिदान और सम्मान की भावना से ओत-प्रोत एक ऐसा आयोजन था, जिसने उपस्थित सभी लोगों के हृदय को गर्व से भर दिया। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और वातावरण में देशभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती थी।
समारोह के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त कर्नल मोतीराम भारद्वाज रहे, जिन्होंने भारतीय सेना में लगभग 40 वर्ष 6 माह तक अपनी सेवाएं दीं। उनके साथ विशेष अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त कैप्टन हंसराज शर्मा, सूबेदार लाल चंद, हवलदार सूहडू़ राम ठाकुर और पूर्व सैनिक अमरनाथ उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि का स्वागत पारंपरिक हिमाचली वाद्य यंत्र नरसिंगा और ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि के बीच किया गया। स्वागत की इस गरिमामयी परंपरा ने पूरे कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। अतिथियों को शॉल, हिमाचली टोपी और राष्ट्रीय ध्वज भेंट कर सम्मानित किया गया। अन्य सभी विशिष्ट अतिथियों को भी मंच पर सम्मान प्रदान किया गया, जिससे उनके योगदान के प्रति समाज की कृतज्ञता स्पष्ट रूप से झलकी।
कार्यक्रम के दौरान कई पूर्व सैनिकों ने मंच से अपने सेवाकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने सीमाओं पर बिताए कठिन दिनों, बर्फीले पहाड़ों, दुर्गम इलाकों और युद्ध जैसे हालातों का उल्लेख किया। उनकी बातें सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे।
कई पूर्व सैनिकों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और भी भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से पूरा कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि देशभक्ति की भावना आज भी नई पीढ़ी के दिलों में जीवित है।
समारोह में उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को तिरंगा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह क्षण अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक था, जब एक साथ सैकड़ों वीरों को राष्ट्रध्वज के साथ अलंकृत किया गया।
मुख्य अतिथि कर्नल मोतीराम भारद्वाज ने अपने संबोधन में अपने लंबे सेवाकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में 40 वर्ष 6 माह तक सेवाएं दीं। उन्होंने देश के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया।
उन्होंने कहा कि सेना में सेवा करना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को देश सेवा के लिए सदैव तैयार रहने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने नशे जैसी कुरीतियों से दूर रहने और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा भी दी।
उनके शब्दों ने उपस्थित युवाओं के मन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
कार्यक्रम के आयोजक सुशील ठाकुर ने अपने संबोधन में भावुक शब्दों में बताया कि उनके पिताजी ने द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था और कई वर्षों बाद घर लौटे थे। उन्होंने कहा कि अपनी माताजी से पिताजी की देशभक्ति और संघर्ष की कहानियां सुनकर उनके मन में सैनिकों के प्रति विशेष सम्मान की भावना उत्पन्न हुई।
इसी भावना के चलते उन्होंने यह सम्मान समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि समाज को उन वीरों का आभार व्यक्त करना चाहिए, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय देश की रक्षा में समर्पित किया।
उन्होंने यह भी बताया कि अब तक करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उनका उद्देश्य है कि हर पंचायत स्तर पर पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित किया जाए।
यह समारोह केवल सम्मान का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि समाज में देशभक्ति की भावना आज भी मजबूत है।
पूर्व सैनिकों के अनुभवों और संदेशों ने युवाओं को अनुशासन, साहस और देश सेवा के महत्व को समझने का अवसर दिया। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाते हैं।
समारोह के अंत में आयोजक सुशील ठाकुर ने सभी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, मुख्य अतिथियों और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन तभी सफल हो पाया है क्योंकि समाज ने मिलकर इसे एक उत्सव का रूप दिया।
यह कार्यक्रम न केवल पूर्व सैनिकों के त्याग और बलिदान का सम्मान करने वाला बना, बल्कि यह समाज में एकता, कृतज्ञता और राष्ट्रप्रेम की भावना को भी सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ।
डिडवीं टिक्कर में आयोजित यह भव्य समारोह लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि समाज अपने वीरों को कभी नहीं भूलता और उनके सम्मान में सदैव खड़ा रहता है।
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