हिमाचल में डिजिटल फ्रॉड अलर्ट: ओटीटी और ऐप्स के जरिए Silent Auto-Debit की बढ़ती घटनाएँ
हिमाचल में डिजिटल फ्रॉड अलर्ट: ओटीटी और ऐप्स के जरिए Silent Auto-Debit की बढ़ती घटनाएँ

Post by : Himachal Bureau

Feb. 23, 2026 5:44 p.m. 115

हिमाचल प्रदेश में डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन ऐप्स के बढ़ते चलन के बीच साइबर अपराधियों का नया रूप सामने आया है। अब अपराधी ‘लो-विजिबिलिटी फ्रॉड मॉडल’ के जरिए आम लोगों की जेबें ढीली कर रहे हैं। इस फ्रॉड का मुख्य हथियार फ्री ट्रायल का लालच और साइलेंट ऑटो-डेबिट है। लोग इसे शुरुआत में मामूली भुगतान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही धीरे-धीरे बड़े वित्तीय नुकसान का रूप ले लेता है।

हिमाचल पुलिस साइबर सेल के विश्लेषण के अनुसार, अपराधी ओटीटी प्लेटफॉर्म, गेमिंग ऐप्स, फिटनेस और हेल्थ सब्सक्रिप्शन के नाम पर यूजर्स को फ्री ट्रायल ऑफर देते हैं। ऐप इंस्टॉल करते समय यूजर से उनके क्रेडिट/डेबिट कार्ड विवरण या UPI ऑटो-पे की अनुमति ली जाती है। ट्रायल खत्म होते ही, बिना किसी स्पष्ट सूचना के उनके खाते से पैसे कटना शुरू हो जाते हैं।

अपराधी शुरुआत में छोटी राशि (10 से 99 रुपये) काटते हैं। इस वजह से अधिकांश यूजर्स को महीनों तक इसका पता नहीं चलता। बाद में यह छोटी रकम बड़ी राशि का रूप ले लेती है, जिससे वित्तीय नुकसान गंभीर हो जाता है।

हिमाचल पुलिस के अनुसार, शिमला, कुल्लू और सोलन जैसे पर्यटन और व्यस्त क्षेत्रों से ऐसी कई शिकायतें मिली हैं। साइबर ठग गूगल सर्च और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए फर्जी ऐप्स को प्रमोट कर रहे हैं। कई मामलों में विदेशी पेमेंट गेटवे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पैसे वापस पाना (रिफंड) बेहद कठिन हो जाता है।

हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा कि किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें। यूजर्स अक्सर सिर्फ ‘Agree’ बटन पर क्लिक कर देते हैं और ऑटो-रिन्यूअल की शर्तों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसका फायदा अपराधी उठाते हैं और यूजर्स का पैसा चुपचाप कट जाता है।

साइबर ठगी से बचने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  1. किसी भी फ्री ट्रायल के लिए भुगतान विवरण देने से पहले ऑटो-पे की शर्तों को ध्यान से जांचें।

  2. अपने बैंक एसएमएस और स्टेटमेंट को नियमित रूप से चेक करें।

  3. मोबाइल के ‘सब्सक्रिप्शन मैनेज’ सेक्शन में जाकर अनावश्यक सेवाओं को तुरंत कैंसल करें।

  4. यदि अनधिकृत कटौती होती है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर ठगों का यह नया तरीका बेहद शांत और छिपा हुआ है, लेकिन घातक साबित हो सकता है। एक छोटी सी सावधानी आपके पैसे और बैंक अकाउंट को बड़ी वित्तीय चपत से बचा सकती है। नागरिकों को जागरूक रहना और डिजिटल सेवाओं का उपयोग सतर्कता के साथ करना बेहद आवश्यक है।

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