हिमाचल सरकार ने 207 करोड़ में मातृ-शिशु संकल्प योजना शुरू की
हिमाचल सरकार ने 207 करोड़ में मातृ-शिशु संकल्प योजना शुरू की

Post by : Ram Chandar

Feb. 23, 2026 3:05 p.m. 2642

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 207.11 करोड़ रुपये की लागत से इंदिरा गांधी मातृ-शिशु संकल्प योजना शुरू की है।

यह योजना जीवन के पहले 1,000 दिनों की संवेदनशील अवधि के दौरान पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुपोषण की समस्या को समन्वित पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल के माध्यम से दूर करने पर केन्द्रित है। इसके तहत छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, आवश्यक कैलोरी और महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाएगा।

राज्यभर में कुल 2,99,488 पात्र लाभार्थियों को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य शिशु मृत्यु दर और रोगग्रस्तता को कम करना तथा समग्र पोषण परिणामों में सुधार लाना है। गंभीर और मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चों, उच्च जोखिम वाले समूहों और कम जन्म वजन वाले शिशुओं की शीघ्र पहचान, निरंतर निगरानी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए सशक्त रेफरल और अनुवर्ती तंत्र विकसित किया जाएगा।

फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे एनीमिया, दस्त और निमोनिया जैसी प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें। योजना के तहत वैज्ञानिक रूप से तैयार पोषक तत्वों से भरपूर फोर्टिफाइड खाद्य प्रीमिक्स, दूध और अंडे प्रदान किए जाएंगे।

गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों तथा कम जन्म वजन वाले शिशुओं के लिए विशेष पोषण और अनुवर्ती प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे। पोषण पुनर्वास केंद्रों को होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर और यंग चाइल्ड केयर की सघन विजिट्स से जोड़ा जाएगा। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को होम-बेस्ड विजिट्स के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

निगरानी तंत्र को पोषण ट्रैकर, माता-शिशु सुरक्षा कार्ड और राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर संयुक्त समीक्षा प्रणाली के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।

योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जल शक्ति विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच संस्थागत अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कुपोषण राज्य में गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है और सरकार इसे समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने से कुपोषण का सामाजिक और आर्थिक बोझ कम होगा और स्वस्थ व समृद्ध समाज का निर्माण संभव होगा।

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