Post by : Ram Chandar
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को डिजिटल बनाने और मरीजों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से हेल्थ प्रोफेशनल पोर्टल के तहत नर्सों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। अब देश या प्रदेश के किसी भी अस्पताल में यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि मरीज को उपचार किस नर्स ने दिया। इसके लिए आभा आईडी को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
इस पोर्टल के माध्यम से मरीज के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वार्ड में दी गई दवाइयों और उपचार से जुड़ी सभी जानकारियां डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगी। वर्तमान में प्रदेश के अस्पतालों में आभा कार्ड से पर्ची बनाने का काम शुरू हो चुका है, हालांकि अभी पर्चियां मैनुअल तरीके से लिखी जा रही हैं। आने वाले समय में कंप्यूटराइज पर्ची की व्यवस्था लागू होगी और चिकित्सक की ओपीडी में पर्ची स्वतः ट्रांसफर हो जाएगी। इसके बाद लिखी गई दवाइयों और टेस्ट की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी।
यदि मरीज को भर्ती किया जाता है, तो उसका पूरा डेटा नर्स के पास ऑनलाइन उपलब्ध होगा। मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद, अगर वह किसी अन्य अस्पताल में जांच करवाता है, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड के माध्यम से उसकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री भी देखी जा सकेगी। अब आभा आईडी में मरीज का उपचार करने वाली नर्स का नाम भी दर्ज रहेगा।
इस पोर्टल पर सरकारी और निजी अस्पतालों की नर्सिंग स्टाफ का पंजीकरण किया जा रहा है, जिससे मरीजों को जानकारी लेने में आसानी होगी। नर्सों की एक यूनिक हेल्थ प्रोफेशनल आईडी बनेगी। यह कार्य आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत किया जा रहा है।
साथ ही, नर्सिंग स्टाफ के साथ पैरा-मेडिकल स्टाफ का भी पंजीकरण किया जा रहा है। जिन चिकित्सकों का पंजीकरण शेष है, उनका डेटा भी पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने आगामी दिनों में स्वास्थ्य कर्मचारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
रविंद्र कुमार, को-ऑर्डिनेटर, आयुष्मान भारत कार्यक्रम सोलन ने बताया कि निजी और सरकारी अस्पतालों में कार्यरत स्टाफ का पंजीकरण होने से लोगों को सुविधा होगी और सभी की एक यूनिक आईडी भी बनेगी। इसके अलावा, डायग्नोस्टिक लैब, फार्मेसी और अन्य स्वास्थ्य संस्थान भी राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ेंगे, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।
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