Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के युवाओं में सेना के प्रति जुनून और देशसेवा का जज्बा एक बार फिर देखने को मिला है। मंडी जिला की ग्राम पंचायत चोलथरा के गांव दिगोह के रहने वाले साहिल ठाकुर ने अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट के पद पर जगह बनाई है। साहिल की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया। साहिल ठाकुर ने सर्विस सिलैक्शन बोर्ड द्वारा आयोजित कठिन चयन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में 16वां स्थान हासिल किया। इस परीक्षा में चयनित होने के बाद अब वह भारतीय सेना में बतौर लैफ्टिनैंट अपनी सेवाएं देंगे और जल्द ही उनका प्रशिक्षण ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में शुरू होगा।
साहिल ठाकुर की सफलता की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने अपने करियर की पहली बड़ी नौकरी और आकर्षक पैकेज को छोड़कर देशसेवा का रास्ता चुना। साहिल के पिता कुलदीप ठाकुर वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार मेजर के पद पर सेवारत हैं, जबकि माता सुमन ठाकुर गृहिणी हैं। साहिल ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई हिमाचल प्रदेश में ही पूरी की और इसके बाद सोलन की जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से बीटेक (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की। उनकी पढ़ाई और मेधा ने उन्हें एक मल्टीनैशनल कंपनी में भी नौकरी दिलाई, जहां उन्हें लाखों रुपए का पैकेज प्रस्तावित किया गया।
लेकिन बचपन से ही देशभक्ति और सेना में सेवा करने का जुनून रखने वाले साहिल ने इस अवसर को ठुकरा दिया। उन्होंने तय किया कि अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह भारतीय सेना में अपने सपनों को साकार करेंगे। साहिल का कहना है कि देशसेवा और समाज के लिए काम करना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है और यही उन्हें उत्साहित करता है।
साहिल के इस निर्णय ने न केवल उनके परिवार को गर्वित किया बल्कि युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा का काम किया है। यह साबित करता है कि अगर किसी के मन में जज्बा और लगन हो तो बड़े अवसर और सम्मान उन्हें अपने जीवन में अवश्य मिलते हैं। साहिल की इस उपलब्धि से पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।
विशेषज्ञों और सेना अधिकारियों का कहना है कि साहिल जैसे युवाओं का चयन भारतीय सेना के लिए गर्व की बात है। इस कठिन परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल करना किसी भी युवा के लिए बड़ी चुनौती होती है, और साहिल ने यह चुनौती सफलता पूर्वक पूरी की है। उनके प्रशिक्षण के दौरान उनके कौशल और नेतृत्व क्षमता को और निखारा जाएगा।
साहिल ठाकुर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि युवा अपनी पढ़ाई और करियर के सुनहरे अवसरों को छोड़कर भी देशसेवा का रास्ता चुन सकते हैं। साहिल का यह कदम न केवल उनके करियर को नई दिशा देगा बल्कि आने वाले समय में सेना और समाज के लिए भी मूल्यवान साबित होगा। उनके इस निर्णय ने साबित कर दिया है कि सच्चा गौरव और सफलता केवल व्यक्तिगत लाभ में नहीं बल्कि देश और समाज की सेवा में भी पाया जा सकता है।
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