Post by : Himachal Bureau
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि सड़कों के निर्माण के साथ-साथ उन पर चलने वाले वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की जान सबसे अनमोल है और सड़क सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
विक्रमादित्य सिंह मंगलवार को हमीरपुर स्थित एनआईटी में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों के लिए राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारियों और इंजीनियरों को अहम दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सड़कों का व्यापक विस्तार हो चुका है और अब नई सड़कों के निर्माण की संभावनाएं लगभग सेचुरेशन स्तर तक पहुंच रही हैं। नेशनल हाईवे निर्माण और अन्य सड़कों के सुधारीकरण से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और इनमें होने वाली मौतों की संख्या को शून्य तक लाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
लोक निर्माण मंत्री ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाएं। इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने और सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित डाटा का नियमित अध्ययन करने पर भी उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि सड़क डिजाइन और निर्माण मानकों में किए गए छोटे-छोटे सुधार कई लोगों की जान बचा सकते हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश के लिए पीएमजीएसवाई-4 का पैकेज मंजूर हो चुका है, जिससे प्रदेश के छोटे-छोटे गांवों तक भी बेहतर सड़कों का निर्माण सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नतियों सहित अन्य मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
उन्होंने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान में कुछ आर्थिक चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है और हिमाचल प्रदेश इन चुनौतियों से बाहर निकलेगा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता एनपी सिंह ने मंत्री का स्वागत किया और कार्यशाला के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।
इससे पहले, उद्घाटन सत्र में हमीरपुर जोन के मुख्य अभियंता विजय चौधरी ने सभी वक्ताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पीडब्ल्यूडी, एनएच, एनएचएआई, मोर्थ और सड़क निर्माण व सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने सड़क दुर्घटनाओं के कारणों, आंकड़ों और रोकथाम के उपायों पर विस्तृत चर्चा की।
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