Post by : Himachal Bureau
आपदा के गहरे जख्मों के साथ जीवन जी रहा समाताना खुर्द गांव आज भी राहत की उम्मीद में है। महीनों बीत जाने के बावजूद यहां के लोगों के घावों पर अब तक मरहम नहीं लग पाया है। आपदा के बाद कई घरों के हिस्से आज भी हवा में लटके हुए हैं और जमीन के लगातार धंसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
नेता और प्रशासन के अधिकारी हालात देखने जरूर पहुंचे, लेकिन ठोस समाधान आज तक नहीं निकल पाया। गांव में बारिश शुरू होते ही अनहोनी का डर चरम पर पहुंच जाता है। हालात इतने भयावह हैं कि कुछ परिवार अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। पांच महीने पहले आई बारिश की आपदा से पैदा हुआ जमीन धंसने का खौफ आज भी ग्रामीणों के दिलों में बैठा हुआ है।
वर्ष 2023 और फिर 2025 की मानसूनी आपदा ने समाताना खुर्द के लोगों का चैन छीन लिया है। जमीन लगातार अपनी पकड़ छोड़ रही है, जिससे कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं और कुछ घरों की सीढ़ियां हवा में लटक रही हैं।
स्थानीय निवासी अमरो देवी, चिंत राम, रोशन लाल और शकुंतला कुमारी ने बताया कि अगस्त-सितंबर 2025 की भारी बारिश ने जो तबाही मचाई, उसकी भरपाई अब तक नहीं हो सकी है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से कई बार डंगे लगाने और सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिले।
ग्रामीणों का आरोप है कि नेता सिर्फ फोटोशूट के लिए आते हैं और बाद में कोई सुध नहीं लेता। आपदा का असर परिवारों तक टूटने लगा है। रोशन लाल ने बताया कि मकान के गिरने के डर से उनकी पत्नी बच्चे लेकर मायके चली गई है, जबकि वह खुद असुरक्षित घर की रखवाली कर रहे हैं।
अमरो देवी ने बताया कि 2023 में मिली एक लाख रुपये की राहत राशि से बनाए गए कमरे में अब दरारें आ चुकी हैं। वहीं सिमरो देवी का कहना है कि उनकी पशुशाला गिर चुकी है, लेकिन उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिली। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि 2023 में मृदा परीक्षण करवाया गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट का आज तक कोई पता नहीं है।
इस संबंध में एसडीएम बड़सर स्वाति डोगरा ने कहा कि आपदा राहत राशि का वितरण किया जा चुका है, लेकिन इस विशेष मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह स्वयं प्रभावित परिवारों से मिलेंगी और स्थिति का जायजा लेकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी।
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