धर्मशाला छात्रा मौत केस: जातिगत प्रताड़ना और प्रोफेसर पर आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR
धर्मशाला छात्रा मौत केस: जातिगत प्रताड़ना और प्रोफेसर पर आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

Post by : Himachal Bureau

Jan. 2, 2026 11:09 a.m. 289

धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की मानसिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रताड़ना और अवसाद से जूझ रही छात्रा ने लुधियाना स्थित डीएमसी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मामले में अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

जानकारी के अनुसार छात्रा बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी और हाल ही में परीक्षा में असफल हुई थी। आरोप है कि कॉलेज में उसके कुछ सहपाठियों द्वारा जाति को लेकर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे वह गहरे अवसाद में चली गई। परिजनों का कहना है कि यह प्रताड़ना इतनी बढ़ गई थी कि छात्रा घर में भी असामान्य व्यवहार करने लगी थी।

प्रोफेसर पर भी गंभीर आरोप

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कॉलेज के एक प्रोफेसर पर छात्रा को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए। परिजनों के अनुसार छात्रा ने खुद यह बात उनके सामने साझा की थी।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छात्रा के स्वजनों ने 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने उस समय जांच के दौरान कॉलेज प्रशासन और छात्रा के पिता के बयान दर्ज किए थे। हालांकि, छात्रा की गंभीर मानसिक स्थिति को देखते हुए वह अपने बयान दर्ज कराने की स्थिति में नहीं थी।

पिता के आग्रह पर बंद हुई थी शिकायत

बताया जा रहा है कि छात्रा के पिता के अनुरोध पर पुलिस ने उस समय शिकायत को बंद कर दिया था। इसके बाद छात्रा की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके चलते उसे इलाज के लिए डीएमसी लुधियाना में भर्ती करवाया गया।

मौत के बाद फिर खुला मामला

इलाज के दौरान 26 दिसंबर को छात्रा की मौत हो गई। मौत से पहले छात्रा का एक वीडियो बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया। इसके बाद पुलिस ने दोबारा संज्ञान लेते हुए छात्रा के पिता के नए बयान दर्ज किए और मामले में एफआईआर दर्ज कर ली

फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। कॉलेज प्रशासन, सहपाठियों और संबंधित प्रोफेसर की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि कॉलेज परिसरों में छुपी मानसिक प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या समय रहते कार्रवाई होती, तो एक जान बच सकती थी?

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