UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.40% MDR, ग्राहक से नहीं लिया जाएगा चार्ज
UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.40% MDR, ग्राहक से नहीं लिया जाएगा चार्ज

Post by : Himachal Bureau

Sept. 16, 2026 1:35 p.m. 107

नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) यूपीआई लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क भुगतान करने वाले ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट यानी भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारी पर लागू होगा।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

NPCI के नए ढांचे के अनुसार, ₹2,000 तक के छोटे मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। वहीं एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले यूपीआई ट्रांसफर भी शुल्क से बाहर रहेंगे। यानी दोस्तों, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को सीधे यूपीआई से पैसे भेजने पर इस नए MDR का असर नहीं पड़ेगा। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत की दर लागू होगी। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है।

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छोटे कारोबारियों को राहत

नए प्रावधानों में छोटे कारोबारियों के लिए भी छूट रखी गई है। यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे मर्चेंट को MDR से छूट दी जाएगी। इसके अलावा ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान पर भी कोई MDR नहीं होगा। NPCI के अनुसार, ₹2,000 तक के छोटे मूल्य वाले लेनदेन यूपीआई मर्चेंट लेनदेन की मात्रा का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इसलिए नए शुल्क का दायरा कुल लेनदेन की तुलना में सीमित रहेगा।

रेलवे, ईंधन और कुछ सेवाओं के लिए अलग शुल्क

कुछ विशेष श्रेणियों के लिए 0.40 प्रतिशत की जगह प्रति लेनदेन ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। इनमें रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम और बीमा जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

UPI के बुनियादी ढांचे के लिए शुल्क

नए MDR ढांचे का उद्देश्य यूपीआई से जुड़े डिजिटल भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाना बताया गया है। सरकार और NPCI के अनुसार, इसका शुल्क ग्राहकों पर सीधे नहीं डाला जाएगा। इस बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन कारोबारी अपनी लागत बढ़ने पर इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने इस फैसले को अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव से भी जोड़ा है। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

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