Kangra News: पूजा शर्मा ने पूरा किया अध्यापिका बनने का सपना
Kangra News: पूजा शर्मा ने पूरा किया अध्यापिका बनने का सपना

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Sept. 16, 2026 1:06 p.m. 106

कांगड़ा। कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियां रोक नहीं पातीं। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और लगन के साथ आगे बढ़ने की कोशिश हो तो मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलता का रास्ता बनाया जा सकता है। कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी क्षेत्र के गांव सुधंगल की बेटी और हमीरपुर के धनेटा (बदरान) की बहू पूजा शर्मा की कहानी इसका उदाहरण है। पूजा शर्मा ने गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई का सफर जारी रखा। दो बच्चों की मां होने के साथ खेतीबाड़ी और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने अध्यापिका बनने के अपने सपने को कभी पीछे नहीं छोड़ा। परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने घर पर रहकर Self Study को अपनी तैयारी का आधार बनाया।

बिना कोचिंग के जारी रखी पढ़ाई

पूजा शर्मा स्वर्गीय पवन कुमार और बीना देवी की बेटी हैं। उनका विवाह धनेटा (बदरान) निवासी ब्रह्मदास के परिवार में हुआ है और वह मंजीत शर्मा की पत्नी हैं। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। कोचिंग सेंटर की मदद लिए बिना उन्होंने घर पर ही नियमित रूप से पढ़ाई की और विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी की। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई को लगातार जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

तीन मास्टर डिग्री और कई परीक्षाएं कीं पास

पूजा शर्मा ने अपनी मेहनत से तीन मास्टर डिग्री हासिल कीं। इसके साथ उन्होंने B.Ed., TET और CTET जैसी परीक्षाएं भी पास कीं। उन्होंने कमीशन की परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की। लगातार तैयारी और प्रयास के बाद उनका अध्यापिका बनने का सपना पूरा हुआ। हाल ही में उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धनेटा, सीबीएसई में समाजशास्त्र शिक्षिका के पद की जिम्मेदारी संभाली है।

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महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

पूजा शर्मा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई या करियर के सपनों को आगे बढ़ाने की कोशिश करती हैं। उन्होंने दिखाया कि परिवार की जिम्मेदारियों के साथ भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा सकता है। पूजा की सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा जा सकता है। उनकी यात्रा परिवार, पढ़ाई और अपने सपने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करने वाली महिलाओं के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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