केंद्रीय बजट 2026-27 हिमाचल के हितों के विपरीत, प्रदेश के साथ हुआ अन्याय: विधायक नीरज नैय्यर
केंद्रीय बजट 2026-27 हिमाचल के हितों के विपरीत, प्रदेश के साथ हुआ अन्याय: विधायक नीरज नैय्यर

Author : Ashok Kumar Chamba

Feb. 3, 2026 10:45 a.m. 136

चंबा के विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हिमाचल प्रदेश के हितों के पूरी तरह विपरीत बताया है। उन्होंने कहा है कि यह बजट प्रदेश की आम जनता, किसानों, बागवानों और युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और इसमें हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की आवश्यकताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

विधायक नीरज नैय्यर ने जारी एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखा गया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह रवैया हिमाचल प्रदेश के साथ सौतेले व्यवहार को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह बजट न केवल राज्य की विकास गति को धीमा करेगा, बल्कि पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहे प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी डालेगा।

विधायक नीरज नैय्यर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने भारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। सड़कों, पुलों, घरों, कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है। ऐसे में प्रदेश की जनता को केंद्रीय बजट 2026-27 से बड़ी उम्मीदें थीं।

उन्होंने कहा कि जनता को यह आशा थी कि केंद्र सरकार इस बजट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए किसी विशेष पैकेज या अतिरिक्त वित्तीय सहायता की घोषणा करेगी, लेकिन बजट में इस संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। विधायक ने इसे आपदा से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता करार दिया।

विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) को समाप्त करने के फैसले पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे सीमित संसाधनों वाले छोटे और पहाड़ी राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान एक अत्यंत महत्वपूर्ण वित्तीय सहारा था। इस अनुदान के माध्यम से राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को सुचारू रूप से चला पाती थी।

उन्होंने कहा, “राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने का निर्णय राज्य की अर्थव्यवस्था पर सीधा और गंभीर प्रहार है। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी और चल रहे विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं प्रभावित होंगी।” विधायक ने आशंका जताई कि इस फैसले का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

विधायक नीरज नैय्यर ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, ग्लेशियरों के पिघलने और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं इसका स्पष्ट प्रमाण हैं। बावजूद इसके, केंद्रीय बजट 2026-27 में जलवायु परिवर्तन से निपटने और पहाड़ी राज्यों को इससे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कोई ठोस नीति या दीर्घकालिक विजन नजर नहीं आता।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो भविष्य में हिमाचल प्रदेश को और भी गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्र सरकार से केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश को उसकी वास्तविक जरूरतों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्यायसंगत बजटीय सहयोग दिया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर काम करना चाहती है, तो उसे हिमाचल जैसे पहाड़ी और आपदा प्रभावित राज्यों के साथ विशेष संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना होगा। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश की अनदेखी इसी तरह जारी रही, तो इसका सीधा असर हिमाचल के विकास और जनता के जीवन स्तर पर पड़ेगा।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #भारत समाचार #भारतीय खबरें #चंबा
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
चांजू नाला भूस्खलन से चंबा-तीसा मार्ग 12 घंटे रहा बंद सरकाघाट में आतंक मचाने वाला खूंखार तेंदुआ आखिरकार पकड़ा गया शाहपुर में सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी, दो करोड़ से बनेगा प्लांट आय घटने से निगम पर बढ़ा आर्थिक दबाव चार करोड़ की कमी जाहू उपतहसील में फोटोस्टैट सेवाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित कुठार में अवैध निर्माण पर टीसीपी विभाग की कार्रवाई नोटिस जारी कीमती धातुओं में जोरदार उछाल सोना-चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड पांगी घाटी में दिखा हिमालयन थार का दुर्लभ झुंड