हिमाचल में दिवाली की रात 47 आग घटनाएं, ₹1.40 करोड़ का नुकसान
हिमाचल में दिवाली की रात 47 आग घटनाएं, ₹1.40 करोड़ का नुकसान

Post by : Shivani Kumari

Oct. 22, 2025 11:03 a.m. 1110

हिमाचल प्रदेश में दिवाली की रात 47 अग्निकांड: ₹1.40 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश, अक्टूबर 2025: दिवाली की रात हिमाचल प्रदेश में आग की 47 घटनाओं ने राज्यवासियों और पर्यटकों के लिए भयावह स्थिति पैदा कर दी। शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा में आग ने करीब ₹1.40 करोड़ की संपत्ति नष्ट कर दी। दमकल विभाग और स्थानीय लोगों की तत्परता से कोई जान का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

कसोल अग्निकांड: पर्यटकों की जान पर संकट

कसोल की सबसे बड़ी आग रात 8 बजे शुरू हुई और दो घंटे में होटल “कसोल इन” तथा आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शी उद्धरण

स्थानीय दुकानदार राम सिंह बताते हैं, “मैंने देखा कि एक कमरे से अचानक धुआँ उठने लगा। हमने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लकड़ी की संरचना के कारण आग तेजी से फैल गई।”

बचाव और प्रशासन

दमकल गाड़ियों को पहुँचने में लगभग 45 मिनट का समय लगा। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लकड़ी के भवनों में अग्नि प्रतिरोधक सामग्री का अनिवार्य प्रयोग होना चाहिए।

आर्थिक नुकसान का सारांश

जिला घटनाओं की संख्या अनुमानित नुकसान (₹)
शिमला 15 50,00,000
कुल्लू 12 40,00,000
मंडी 10 25,00,000
कांगड़ा 8 15,00,000
अन्य 2 10,00,000
कुल 47 1,40,00,000

मंडी और शिमला में भयावह घटनाएँ

मंडी में बुजुर्ग महिला को जलते घर से सुरक्षित निकालने की घटना ने स्थानीय निवासियों के साहस को दिखाया। बिंद्रावणी डंपिंग साइट पर आग नगर निगम की लापरवाही की मिसाल रही। शिमला की संकरी गलियों और अनियोजित निर्माण ने आग फैलने की गति बढ़ाई। संजौली के घने बाजार को दमकल विभाग की तत्परता से राख होने से बचाया गया।

पटाखों से झुलसे लोग

कांगड़ा में 62 और हमीरपुर में 18 लोग पटाखों के कारण झुलसे। प्राथमिक उपचार के लिए बर्न यूनिट की कमी स्पष्ट हुई। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पर्वों के दौरान ग्रामीण और उप-मंडलीय अस्पतालों में विशेषज्ञ बर्न यूनिट की सुविधा अनिवार्य हो।

प्रशासन और नागरिक जिम्मेदारी

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कुछ तैयारी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं साबित हुई। पर्यटन विभाग और नगर निगम द्वारा होटलों में नियमित फायर ऑडिट नहीं किए जाने से जोखिम बढ़ा। होटल मालिकों ने सुरक्षा मानकों में कमी की और कर्मचारियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया। नागरिकों ने भी पटाखों के सुरक्षित प्रयोग के नियमों की अनदेखी की।

विशेषज्ञ की राय

विशेषज्ञ दीपक भट्ट कहते हैं, “हिमाचल में पर्वों के दौरान आग का जोखिम हमेशा रहता है। प्रशासन और नागरिक दोनों को मिलकर सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।”

आगे की राह: अग्नि सुरक्षा की आवश्यकता

  • पर्यटन स्थलों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र अनिवार्य।
  • दमकल विभाग के लिए आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और मानव संसाधन में सुधार।
  • दुर्गम क्षेत्रों में मिनी फायर स्टेशन और त्वरित प्रतिक्रिया चौकियों की स्थापना।

हिमाचल के 47 अग्निकांड केवल आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक चेतावनी हैं। सरकार, उद्योग और नागरिकों को मिलकर एक ‘अग्नि सुरक्षित हिमाचल’ बनाने का संकल्प लेना होगा।

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