Post by : Shivani Kumari
हिमाचल प्रदेश, अक्टूबर 2025: दिवाली की रात हिमाचल प्रदेश में आग की 47 घटनाओं ने राज्यवासियों और पर्यटकों के लिए भयावह स्थिति पैदा कर दी। शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा में आग ने करीब ₹1.40 करोड़ की संपत्ति नष्ट कर दी। दमकल विभाग और स्थानीय लोगों की तत्परता से कोई जान का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
कसोल की सबसे बड़ी आग रात 8 बजे शुरू हुई और दो घंटे में होटल “कसोल इन” तथा आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।
स्थानीय दुकानदार राम सिंह बताते हैं, “मैंने देखा कि एक कमरे से अचानक धुआँ उठने लगा। हमने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लकड़ी की संरचना के कारण आग तेजी से फैल गई।”
दमकल गाड़ियों को पहुँचने में लगभग 45 मिनट का समय लगा। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लकड़ी के भवनों में अग्नि प्रतिरोधक सामग्री का अनिवार्य प्रयोग होना चाहिए।
| जिला | घटनाओं की संख्या | अनुमानित नुकसान (₹) |
|---|---|---|
| शिमला | 15 | 50,00,000 |
| कुल्लू | 12 | 40,00,000 |
| मंडी | 10 | 25,00,000 |
| कांगड़ा | 8 | 15,00,000 |
| अन्य | 2 | 10,00,000 |
| कुल | 47 | 1,40,00,000 |
मंडी में बुजुर्ग महिला को जलते घर से सुरक्षित निकालने की घटना ने स्थानीय निवासियों के साहस को दिखाया। बिंद्रावणी डंपिंग साइट पर आग नगर निगम की लापरवाही की मिसाल रही। शिमला की संकरी गलियों और अनियोजित निर्माण ने आग फैलने की गति बढ़ाई। संजौली के घने बाजार को दमकल विभाग की तत्परता से राख होने से बचाया गया।
कांगड़ा में 62 और हमीरपुर में 18 लोग पटाखों के कारण झुलसे। प्राथमिक उपचार के लिए बर्न यूनिट की कमी स्पष्ट हुई। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पर्वों के दौरान ग्रामीण और उप-मंडलीय अस्पतालों में विशेषज्ञ बर्न यूनिट की सुविधा अनिवार्य हो।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कुछ तैयारी की थी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं साबित हुई। पर्यटन विभाग और नगर निगम द्वारा होटलों में नियमित फायर ऑडिट नहीं किए जाने से जोखिम बढ़ा। होटल मालिकों ने सुरक्षा मानकों में कमी की और कर्मचारियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया। नागरिकों ने भी पटाखों के सुरक्षित प्रयोग के नियमों की अनदेखी की।
विशेषज्ञ दीपक भट्ट कहते हैं, “हिमाचल में पर्वों के दौरान आग का जोखिम हमेशा रहता है। प्रशासन और नागरिक दोनों को मिलकर सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।”
हिमाचल के 47 अग्निकांड केवल आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक चेतावनी हैं। सरकार, उद्योग और नागरिकों को मिलकर एक ‘अग्नि सुरक्षित हिमाचल’ बनाने का संकल्प लेना होगा।
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