अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड में प्रदर्शन तेज
अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड में प्रदर्शन तेज

Post by : Himachal Bureau

Jan. 5, 2026 4:48 p.m. 1823

उत्तराखंड के बहुचर्चित 19 वर्षीय अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर पूरे राज्य में उबाल ला दिया है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो और ऑडियो क्लिप के बाद लोग CBI जांच की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। राजधानी देहरादून सहित टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा और अन्य जिलों में युवाओं, महिलाओं और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रदर्शन किए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

देहरादून में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान “मुख्यमंत्री मौन हैं, वीआईपी कौन है?” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले में अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं और एक कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है, जिसके लिए CBI जांच जरूरी है।

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थीं। 18 सितंबर 2022 को लापता होने के बाद 24 सितंबर को उनका शव ऋषिकेश की एक नहर से बरामद हुआ था। आरोप है कि एक वीआईपी गेस्ट की कथित यौन मांग को ठुकराने पर रिसॉर्ट मैनेजर पुलकित आर्य और उसके साथियों ने उनकी हत्या कर दी। पुलकित आर्य पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है, जिन्हें घटना के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

इस मामले में पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 47 गवाह पेश किए थे और व्हाट्सएप चैट के जरिए यह साबित किया गया कि अंकिता एक अश्लील प्रस्ताव से परेशान थीं। बचाव पक्ष की ओर से आत्महत्या का दावा किया गया था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

हाल ही में मामला फिर तब गरमाया जब पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर द्वारा एक ऑडियो क्लिप जारी की गई, जिसमें एक कथित वीआईपी पर आरोप लगाए गए। इस क्लिप में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम सहित अन्य नेताओं का नाम लिया गया, हालांकि गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है। बाद में राठौर ने क्लिप को एआई जनरेटेड बताते हुए इसे पार्टी को बदनाम करने की साजिश करार दिया। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इन घटनाक्रमों के बाद राज्य में फिर से आंदोलन तेज हो गया है। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा, सीपीआई(एम), सीपीआई(एमएल) और एसयूसीआई जैसे दलों ने आंदोलन को समर्थन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने 11 जनवरी को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार CBI जांच की सिफारिश नहीं करती तो सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIT पर दबाव है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है, जिससे जनता में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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