Post by : Shivani Kumari
दिव्य हिमाचल न्यूज़, शिमला : हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में चल रहा 592 प्रवक्ताओं के डिमोशन का मामला अब खुद विभाग के लिए परेशानी का कारण बन गया है। विभाग ने कोर्ट में चल रहे केस के कारण इन शिक्षकों को वापस टीजीटी पद पर भेजने का नोटिस तो जारी कर दिया है, लेकिन इसके बाद क्या करना है — इस पर विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने इन सभी प्रवक्ताओं को वापस उनके पुराने पदों पर भेजने के लिए नोटिस जारी किए हैं। मगर हैरानी की बात यह है कि खुद विभाग अभी इस प्रक्रिया को लेकर असमंजस में है। विभाग ने कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर नोटिस जारी कर दिए, लेकिन शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर कोई दिशा-निर्देश तय नहीं किए गए हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अगर ये सभी शिक्षक टीजीटी पद पर जाएंगे तो उन्हें अन्य स्कूलों में समायोजित किया जाना होगा, क्योंकि फिलहाल जिन स्कूलों में वे प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं, वहां उनके स्थान पर नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है।
शिक्षकों का कहना है कि विभाग ने जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि अब उन्हें कहाँ भेजा जाएगा। यह स्थिति शिक्षकों और स्कूल दोनों के लिए असमंजस की बनी हुई है।
शिक्षा विभाग का तर्क : विभाग का कहना है कि हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है और इस वजह से 28 अक्टूबर की सुनवाई से पहले नोटिस जारी किए गए हैं। परंतु शिक्षकों का पक्ष है कि कोर्ट में अंतिम निर्णय आने से पहले इस तरह का कदम उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि शिक्षण व्यवस्था को भी अस्त-व्यस्त कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, अगर शिक्षकों को डिमोट किया जाता है तो उन्हें अपने मौजूदा स्कूलों से हटकर किसी अन्य स्थान पर भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए विभाग को नई पदस्थापन सूची बनानी होगी, मगर अब तक ऐसी कोई सूची या ट्रांसफर योजना तैयार नहीं की गई है।
शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय उनके करियर और मानसिक स्थिति दोनों को प्रभावित करेगा। विभाग ने उन्हें बिना विकल्प और स्पष्ट दिशा के केवल नोटिस देकर छोड़ दिया है।
28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई : इस पूरे मामले में 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है। प्रभावित शिक्षकों ने भी हाईकोर्ट का रुख किया है और मांग की है कि विभाग को इस तरह की अधूरी प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए जाएं।
मुख्य बिंदु :
फिलहाल शिक्षा विभाग इस पूरे मसले पर आंतरिक समीक्षा कर रहा है, ताकि कोर्ट के आदेशों और व्यावहारिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाया जा सके। परंतु शिक्षकों का कहना है कि विभागीय नीतियों की कमी और जल्दबाजी ने उनके भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।
– रिपोर्ट: दिव्य हिमाचल ब्यूरो, शिमला
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