भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता के लिए बड़े बैंकिंग सुधारों की घोषणा की
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता के लिए बड़े बैंकिंग सुधारों की घोषणा की

Post by : Shivani Kumari

Nov. 8, 2025 8:57 p.m. 4854

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में किए गए बैंकिंग सुधार देश की वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और जीवन से जुड़ा बनाने के लिए लागू किए गए हैं। अब बैंकों को अपनी प्रमुख पूंजी का चालीस प्रतिशत तक बाजार में निवेश करने की अनुमति मिल गई है, जिससे उनके आमदनी के रास्ते और अधिक व्यापक हो गए हैं। इससे देश के पूंजी बाजार को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे और औद्योगिक इकाइयों को लंबी अवधि के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा।

अधिग्रहण वित्तपोषण के क्षेत्र में भी बहुप्रतीक्षित छूट प्रदान की गई है। पहले जहां बैंकों को अधिग्रहण के सौदों में सीमित कर्ज देने की अनुमति थी, वहीं अब वे कुल सौदे के मूल्य का सत्तर प्रतिशत तक ऋण दे सकते हैं। इसके साथ ही ऋण और इक्विटी का अनुपात दृढ़ निगरानी में रहेगा, ताकि अत्यधिक कर्ज का जोखिम ना बढ़ सके और सौदों में पारदर्शिता तथा अनुशासन बना रहे।

ऋण वितरण में जोखिम की गहन जांच के लिए अब एक नया ढांचा लागू हो गया है, जिसके तहत बैंकों को ऋण देते समय संपत्ति के मूल्य, लेनेवाले की साख और संभावित जोखिम के आधार पर फैसला करना होगा। इससे ऋण में हानि या चूक के मामलों में कमी आएगी और बैंकों की वित्तीय स्थिति अधिक सुदृढ़ होगी।

बचत खातों में नामांकन की सुविधा सुगम बना दी गई है। अब एक खाते में चार तक नामांकित व्यक्ति जोड़े जा सकते हैं और नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हुई है। इससे परिवारजनों द्वारा दावा करने की प्रक्रिया सरल और निष्पक्ष हो जाएगी।

जमा बीमा के नए नियमों के तहत अब मजबूत बैंकों को कम बीमा शुल्क देना पड़ेगा और जोखिम वाले बैंकों को ज्यादा। इसका सीधा लाभ जमाकर्ताओं को मिलेगा क्योंकि उनका धन अब अधिक सुरक्षित रहेगा।

लघु, मझोले उद्योगों एवं गृह ऋण क्षेत्र के लिए भी वित्तीय नियमों में राहत दी गई है, जिससे छोटे व्यवसायों व आम लोगों को बैंक से ऋण लेना पहले से आसान होगा। इससे रोजगार के अवसरों के साथ आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी।

इन सभी परिवर्तनों से भारत की अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा। विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ मानती हैं कि ऐसा करके भारत ने अपने बैंकिंग तंत्र को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की दिशा में मजबूत कदम उठाया है। भविष्य में जब बैंकिंग पूरी तरह डिजिटल होगी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण और विदेशी निवेश सीमा का विस्तार होगा, तो यह समूचा तंत्र देश को आर्थिक रूप से नए शिखर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

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