Post by : Himachal Bureau
इंदौर | 04 जनवरी 2026
वैश्विक राजनीति के इतिहास में 3 जनवरी 2026 की रात एक बेहद चौंकाने वाला और विवादास्पद अध्याय जुड़ गया, जब अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास पर अचानक सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ़्तार कर लिया। इस तेज़ और सुनियोजित ऑपरेशन ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी सेना द्वारा किए गए इस ऑपरेशन में लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के ज़रिये कराकास के प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। महज़ आधे घंटे में अमेरिकी विशेष बल राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गए और मादुरो दंपती को हिरासत में ले लिया। वेनेज़ुएला की रक्षा प्रणाली इस अचानक हमले का प्रभावी जवाब नहीं दे सकी।
गिरफ़्तारी के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन्हें न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अमेरिकी अदालतों में उन पर नारको-टेररिज्म, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियार व्यापार जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को “अमेरिकी सुरक्षा के लिए आवश्यक और सफल मिशन” करार दिया। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि निकोलस मादुरो वर्षों से ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े हुए थे और वेनेज़ुएला को नारको-स्टेट बना दिया गया था। अमेरिका का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ उठाया गया निर्णायक कदम है।
हालांकि, इस कार्रवाई पर वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई देशों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है। नियमों के अनुसार किसी भी संप्रभु देश पर सैन्य हमला केवल आत्मरक्षा या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति से ही किया जा सकता है।
विरोधियों का यह भी आरोप है कि वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडार इस हमले के पीछे एक बड़ा कारण हो सकते हैं। इतिहास गवाह रहा है कि अमेरिका द्वारा किए गए कई विदेशी हस्तक्षेप संबंधित देशों में अस्थिरता, गृहयुद्ध और लंबे समय तक संकट लेकर आए हैं।
दूसरी ओर, इस कार्रवाई के समर्थकों का कहना है कि मादुरो का शासन दमनकारी था। देश में गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई, भुखमरी और मानवाधिकार उल्लंघनों के चलते लाखों लोग वेनेज़ुएला छोड़ने को मजबूर हुए। समर्थकों के अनुसार मादुरो की गिरफ़्तारी लोकतंत्र की बहाली की दिशा में पहला कदम हो सकती है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और इस मामले में संयम, संवाद और कूटनीति की आवश्यकता है।
प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम का कहना है कि यह घटना केवल वेनेज़ुएला तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन, अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता और विकासशील देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों को इस घटनाक्रम से सबक लेते हुए अपनी विदेश नीति और सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, वेनेज़ुएला पर अमेरिका का सैन्य हमला और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ़्तारी एक ऐतिहासिक और नैतिक रूप से जटिल घटना है। यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि यह कार्रवाई सही थी या गलत, लेकिन इतना तय है कि इसके प्रभाव लंबे समय तक वैश्विक राजनीति को दिशा देते रहेंगे।
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