मोबाइल और सोशल मीडिया पर बच्चों का ज्यादा समय, माता‑पिता चिंतित
मोबाइल और सोशल मीडिया पर बच्चों का ज्यादा समय, माता‑पिता चिंतित

Post by : Mamta

Dec. 23, 2025 12:29 p.m. 1584

भारत में बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है और यह माता-पिता के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। आजकल घर हो या आसपास, बच्चे मैदान में खेलने के बजाय मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप पर समय बिताते हैं। पढ़ाई, मनोरंजन और दोस्तों से बातचीत भी अब डिजिटल माध्यमों तक सीमित हो गई है। खासकर शहरी इलाकों में यह समस्या ज्यादा दिखाई दे रही है।

अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे घंटों मोबाइल पर सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल अब सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इससे उनकी पढ़ाई, मानसिक विकास और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।

सरकार ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए DPDP 2025 के तहत नियम लागू किए हैं। इन नियमों के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इस्तेमाल करने से पहले कंपनियों को माता-पिता की सहमति लेना जरूरी है। इसके अलावा बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर विज्ञापन भेजना भी प्रतिबंधित है। हालांकि, अभिभावकों का मानना है कि सिर्फ कानून बनाने से समस्या हल नहीं होगी, ठोस और व्यवहारिक कदम भी जरूरी हैं।

हाल ही में 302 शहरी क्षेत्रों में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि आधे से ज्यादा बच्चे रोजाना तीन घंटे से अधिक समय मोबाइल पर बिता रहे हैं। लगभग 70 प्रतिशत माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे यूट्यूब और वीडियो स्ट्रीमिंग का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

सर्वे में यह भी पाया गया कि मोबाइल और सोशल मीडिया के अधिक उपयोग का असर बच्चों के व्यवहार पर साफ दिखाई दे रहा है। 61 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि उनके बच्चे जल्दी गुस्सा कर लेते हैं। 58 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ने की बात कही। करीब 50 प्रतिशत माता-पिता के अनुसार बच्चे अब ज्यादा जिद्दी, शरारती और उछल-कूद करने वाले हो गए हैं।

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