ऊना में गेहूं पर Yellow Rust खतरा, किसानों को Alert
ऊना में गेहूं पर Yellow Rust खतरा, किसानों को Alert

Post by : Himachal Bureau

Feb. 9, 2026 3:49 p.m. 1967

हिमाचल प्रदेश के कृषि प्रधान जिला ऊना में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ (Yellow Rust) रोग का खतरा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने किसानों से कहा है कि वे अपनी फसल पर लगातार नजर बनाए रखें और यदि पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत खंड कृषि अधिकारी को सूचना दें, ताकि समय रहते रोग को फैलने से रोका जा सके।

कृषि विभाग के अनुसार पीला रतुआ फैलने का सबसे ज्यादा खतरा फरवरी महीने में रहता है। जिला ऊना में करीब 35,514 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की जाती है। यहां से हर वर्ष लगभग 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है, साथ ही करीब 8 लाख क्विंटल पशुचारा (तूड़ी) भी निकलता है। इसमें 20,941 हेक्टेयर गैर सिंचित और 14,573 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र शामिल है।

विशेषज्ञों के अनुसार पीला रतुआ रोग होने पर गेहूं की पत्तियों पर पीले रंग का पाउडर जैसा पदार्थ बनने लगता है। इसे छूने पर हाथों पर पीला रंग लग जाता है। यदि इस रोग को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो यह हवा और पानी के माध्यम से तेजी से पूरे खेत और आसपास के क्षेत्रों में फैल सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फसल में पीलापन कई पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। यदि ऊपर की पत्तियों में पीलापन दिखाई दे तो सल्फर की कमी हो सकती है, जबकि बीच के हिस्से में हल्के भूरे धब्बे जिंक की कमी की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी फसल की नियमित जांच और आवश्यक पोषण प्रबंधन करना जरूरी है।

पीला रतुआ रोग का असर केवल गेहूं की पैदावार पर ही नहीं पड़ता बल्कि पशुओं के लिए मिलने वाले चारे की मात्रा भी कम हो जाती है। इससे किसानों को दोहरी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कृषि विभाग ने किसानों को समय रहते इस रोग की पहचान कर उचित कदम उठाने की सलाह दी है।

कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने किसानों से अपील की है कि वे फरवरी महीने के दौरान अपनी फसल पर विशेष ध्यान रखें। यदि फसल में पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विभाग से संपर्क करें, ताकि इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सके।

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