Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को ऊना में एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। महर्षि वाल्मीकि गुरु रविदास यूथ एकता महासभा हिमाचल प्रदेश के बैनर तले बड़ी संख्या में पदाधिकारियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के समर्थन में रैली और प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन की शुरुआत ऊना के पुराने बस स्टैंड से की गई, जहां महासभा के कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यहां से रैली मिनी सचिवालय तक निकाली गई। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने यूजीसी के समर्थन में जोरदार नारे लगाए और उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की मांग उठाई। प्रदर्शन में महासभा के पदाधिकारियों के अलावा ओबीसी संगठन के प्रतिनिधि, युवा कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल हुए।
रैली के समापन पर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अमित वाल्मीकि के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एडीसी ऊना महिंद्र पाल गुज्जर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया गया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को और अधिक सशक्त बनाया जाए ताकि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
प्रदेश अध्यक्ष अमित वाल्मीकि ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग देश की शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह संस्था न केवल उच्च शिक्षा संस्थानों को दिशा और संसाधन उपलब्ध कराती है, बल्कि अनुसंधान को बढ़ावा देने, शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने में भी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी को कमजोर किया गया तो इसका सीधा असर देश के छात्रों और शोधार्थियों पर पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और अवसरों की समानता सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी को आवश्यक अधिकार और संसाधन प्रदान किए जाएं। महासभा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर संगठित किया जाएगा।
इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि महासभा के मुख्य सलाहकार चंचल सिंह, प्रवक्ता वलराम महें, इकाई ऊना के अध्यक्ष इशांत घुग्गा, चौधरी फाउंडेशन के अध्यक्ष सर्वण सिंह, डॉक्टर अंबेडकर मिशन के अध्यक्ष एमआर दड़ोच, नवदीप महें, कुलवर्ण, भूपिंदर जसल, राहुल बग्गा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में उच्च शिक्षा के संरक्षण और मजबूती की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन महासभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा और विद्यार्थियों के हितों से जुड़ा कोई भी मुद्दा उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वे भविष्य में भी अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
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