वरिष्ठ अभिनेत्री प्रविणा देशपांडे का निधन, हिंदी-मराठी सिनेमा में बड़ा नुकसान
वरिष्ठ अभिनेत्री प्रविणा देशपांडे का निधन, हिंदी-मराठी सिनेमा में बड़ा नुकसान

Post by : Himachal Bureau

Feb. 18, 2026 12:54 p.m. 2420

मनोरंजन जगत ने वरिष्ठ अभिनेत्री प्रविणा देशपांडे को हमेशा के लिए खो दिया। उनका निधन 17 फरवरी 2026 को 60 वर्ष की आयु में हुआ। लंबे समय से गंभीर बीमारी कैंसर से जूझ रही प्रविणा ने अपने अभिनय जीवन में हिंदी और मराठी फिल्मों में अनेक यादगार भूमिकाएँ निभाईं। उनके निधन की सूचना परिवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उनका अंतिम संस्कार उसी दिन अंधेरी, मुंबई के हिंदू श्मशान घाट में किया गया।

प्रविणा ने अपने अभिनय की यात्रा रंगमंच से शुरू की और धीरे-धीरे दूरदर्शन और फिल्मों में भी अपनी छवि बनाई। उन्हें विशेष पहचान सलमान खान की फिल्म "रेडी" (2011) में शालू चौधरी की भूमिका से मिली। इसके अलावा उन्होंने बॉम्बे टॉकीज, डी-डे, मॉनसून शूटआउट, परमाणु, एक विलेन, जलेबी जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उनके अभिनय की सरलता और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों में हमेशा एक विशेष जगह बनाई।

दूरदर्शन और टेलीविजन में भी प्रविणा का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने धारावाहिक घर एक मंदिर, कुमकुम, करम अपना अपना, कुल्फी कुमार बाजेवाला में भी अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा। वेब श्रृंखला में भी उन्होंने अपनी भूमिकाओं से दर्शकों को प्रभावित किया, जैसे द फैमिली मैन सीजन 3 में मनोज बाजपेयी की मां का किरदार और हाल ही में टास्करी (2026) में उनकी कैमियो भूमिका। उनके प्रत्येक किरदार में भावनात्मक गहराई, संवेदनशीलता और स्पष्टता दिखाई देती थी।

प्रविणा देशपांडे को वर्ष 2019 में मल्टीपल मायेलोमा नामक गंभीर कैंसर हुआ। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और निरंतर अपने काम में जुटी रहीं। उनके परिवार और नजदीकी रिश्तेदार हर समय उनका साथ देते रहे और उनके स्वास्थ्य व उपचार में मदद करते रहे। उनके पति, पुत्र, पुत्री और अन्य करीबी संबंधियों ने हमेशा उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें अकेला नहीं छोड़ने दिया।

सिनेमा और टेलीविजन कलाकार संघ (CINTAA) ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि प्रविणा देशपांडे का योगदान हिंदी और मराठी सिनेमा में अमूल्य है। उनका समर्पण, मेहनत और कला हमेशा मनोरंजन जगत में याद रखी जाएगी। उनके अभिनय और निभाए गए किरदार सदैव दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे।

प्रविणा देशपांडे का जीवन यह संदेश देता है कि कठिनाई और बीमारी के बावजूद यदि हौसला, आत्मविश्वास और मेहनत साथ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।

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