हिमाचल प्रदेश के पांगी घाटी में 15 दिन चलने वाले जुकारू उत्सव का शानदार उद्घाटन
हिमाचल प्रदेश के पांगी घाटी में 15 दिन चलने वाले जुकारू उत्सव का शानदार उद्घाटन

Post by : Himachal Bureau

Feb. 18, 2026 3:07 p.m. 126

हिमाचल प्रदेश के पांगी में बुधवार से 15 दिवसीय जुकारू उत्सव का भव्य आगाज हो गया है। यह उत्सव पांगी के लोगों के बीच भाईचारे, परंपरा और सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक माना जाता है।

उत्सव की तैयारियां मंगलवार मध्यरात्रि से शुरू हुईं। घाटी के लोग अपने-अपने घरों की दीवारों पर बलीराजा के चित्र उकेरकर उसकी प्राण प्रतिष्ठा की। पंगवाल समुदाय के लोग अपने घरों में सफाई और लिपाई-पुताई करते हैं। शाम को घर के मुखिया भरेस भंगड़ी और आटे के बकरे बनाते हैं। यह कार्य करते समय सभी शांत रहते हैं और पूजा सामग्री अलग कमरे में रखी जाती है। रात्रिभोज के बाद गोबर की लिपाई भी की जाती है।

सुबह तीन बजे बलीराज की गंगाजल से विशेष पूजा अर्चना की गई और उसका प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। इसके बाद 15 दिनों तक पांगी घाटी के लोग बलीराज की पूजा करेंगे। इस दौरान चौका बनाया जाता है। गेहूं और जौ के सत्तुओं से मंडप सजाया जाता है। मंडप के सामने बलीराज की मूर्ति रखी जाती है और आटे से बने बकरे, मेंढ़े आदि तिनकों की सहायता से स्थापित किए जाते हैं।

उत्सव के दौरान लोग एक-दूसरे के घर जाकर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में पड़ीद कहा जाता है। छोटे बच्चे अपने बड़े सदस्यों के चरणों को छूकर आशीर्वाद लेते हैं और बड़े उन्हें स्नेहपूर्वक आशीर्वाद देते हैं। राजा बलि की पूजा के लिए पनघट से पवित्र जल लाया जाता है और जल देवता की भी पूजा होती है।

तीसरे दिन ‘मांगल’ या ‘पन्हेई’ के रूप में भूमि पूजन किया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों से सत्तू, घी, शहद, आटे के बकरे, जौ और गेहूं लाते हैं। इन सामग्रियों से भूमि पूजन किया जाता है और कहीं-कहीं नाच-गान भी होता है। इस पर्व के बाद पंगवाल लोग अपने खेतों में काम शुरू करते हैं।

उत्सव में स्वांग नृत्य भी आयोजित होता है। नाग देवता के कारदार को स्वांग के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लंबी जटाएं, दाढ़ी, मूछ और हाथ में कटार लिए कलाकार पूरे दिन नृत्य करते हैं और दिन के अंत में स्वांग को उसके घर पहुंचाया जाता है।

पंगवाल एकता मंच के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने सभी पांगी वासियों को जुकारू उत्सव की बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि पांगी का जुकारू उत्सव प्रदेश स्तर पर मान्यता प्राप्त करे।

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