कोटखाई में भीषण आग से 50 कमरे खाक, 8 परिवार बेघर, 7 करोड़ का नुकसान
कोटखाई में भीषण आग से 50 कमरे खाक, 8 परिवार बेघर, 7 करोड़ का नुकसान

Post by : Khushi Joshi

Dec. 4, 2025 11:53 a.m. 2567

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में बुधवार दोपहर बड़ा अग्निकांड देखने को मिला। कोटखाई के बड़वी गांव में लगभग 12 बजे एक रिहायशी बहुमंजिला मकान में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैलती गई कि देखते ही देखते आठ परिवारों के करीब 50 कमरे जलकर राख हो गए। आसमान में उठता घना धुआं पूरे इलाके में दहशत फैलाने वाला था और लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षा के लिए बाहर निकल आए।

आग लगने के कुछ ही मिनटों में लकड़ी से बने संरचनात्मक हिस्सों ने आग को और भड़काने का काम किया। ग्रामीणों ने घरों में रखा सामान बाहर निकालने की पूरी कोशिश की, मगर लपटों के आगे किसी की एक न चली। इस हादसे में जिन परिवारों के घर जल गए उनमें प्रकाश, प्रताप, बलवीर, सुरेश, सीमित भूस्तू, देनी, जोवन, राजेंद्र और ओम के नाम शामिल हैं। कई परिवारों को रात बिताने तक के लिए अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर शरण लेनी पड़ी।

स्थानीय लोगों के साथ मिलकर दमकल विभाग की टीम आग पर नियंत्रण पाने में लगातार जुटी रही। कोटखाई और आस-पास के क्षेत्रों से चार फायर टेंडर मौके पर भेजे गए, लेकिन दुर्गम सड़क, संकरी ढलान और बीच रास्ते लगे जाम की वजह से दमकल वाहन कुछ देर से घटनास्थल पर पहुंच सके। इसके चलते लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई। हालांकि कर्मचारियों ने पहुंचते ही तुरंत आग बुझाने के अभियान को तेज कर दिया और देर शाम तक आग को काफी हद तक काबू में कर लिया गया, लेकिन धुआं अब भी उठता रहा।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। फायर स्टेशन प्रभारी केसर नेगी के अनुसार, आग इतनी विकराल थी कि सही-सही नुकसान के आंकलन में समय लगेगा, लेकिन अनुमान है कि कुल नुकसान 7 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

जैसे ही घटना की सूचना प्रशासन तक पहुंची, तहसील और स्थानीय प्रशासन की टीम राहत सामग्रियों के साथ गांव पहुंची। प्रभावित हर परिवार को 5-5 हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है। इसके साथ ही कंबल और तिरपाल भी उपलब्ध कराए गए, ताकि ठंड में लोगों को अस्थायी आश्रय मिल सके। प्रशासन ने सभी प्रभावितों को नजदीकी सुरक्षित भवन में अस्थायी रूप से ठहराने की व्यवस्था की है और आगे की सहायता कार्रवाई जारी है।

गांव के लोगों का कहना है कि इस त्रासदी के बाद वे बिल्कुल बेसहारा हो गए हैं, क्योंकि घर ही नहीं, जीवनभर की कमाई कुछ ही घंटों में राख बन गई। लोग अब सरकार और प्रशासन से पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि वे दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।

कोटखाई के इस दर्दनाक अग्निकांड ने साबित किया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आग की घटनाओं से लड़ने के लिए मजबूत योजना और समय पर संसाधनों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। फिलहाल, राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और प्रशासन ने हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।

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