नववर्ष से पहले सख्ती: शिमला जिले से हटेंगे सभी बेसहारा पशु
नववर्ष से पहले सख्ती: शिमला जिले से हटेंगे सभी बेसहारा पशु

Post by : Khushi Joshi

Dec. 22, 2025 5:02 p.m. 486

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को आने वाले नए वर्ष में बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सड़क किनारे घूम रहे बेसहारा पशुओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त अनुपम कश्यप ने पूरे जिले में 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाने के आदेश जारी किए हैं। इस अभियान के तहत हर उपमंडल स्तर पर समितियों का गठन कर दिया गया है, जिनका जिम्मा चिन्हित बेसहारा पशुओं को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक पहुंचाना होगा।

जारी अधिसूचना के अनुसार प्रत्येक उपमंडल में गठित समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे। समिति में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर निकाय या पंचायत के प्रतिनिधि, स्थानीय गौशाला अथवा पशु आश्रय का प्रतिनिधि शामिल रहेंगे, जबकि वरिष्ठ पशु चिकित्सक को सदस्य सचिव बनाया गया है। इन समितियों को अपने-अपने क्षेत्रों में 15 दिनों के भीतर सभी बेसहारा पशुओं को इकट्ठा कर नजदीकी गौशालाओं में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिन के बाद उपायुक्त कार्यालय में प्रस्तुत की जाएगी, ताकि अभियान की निगरानी की जा सके। जिला प्रशासन की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जनवरी 2026 तक शिमला जिले के सभी चिन्हित स्थानों से बेसहारा पशुओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय दिया जाएगा। लक्ष्य यह रखा गया है कि नए साल की शुरुआत शिमला को पूरी तरह बेसहारा पशु मुक्त बनाकर की जाए।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार पूरे जिले में फिलहाल 272 बेसहारा पशु चिन्हित किए गए हैं, जो सर्दियों के मौसम में न केवल खुद खतरे में रहते हैं बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। उपायुक्त ने कहा कि पशुधन हमारी धरोहर है और इन्हें यूं ही सड़कों पर छोड़ देना अमानवीय है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि जिन्होंने अपने पशुओं को बेसहारा छोड़ा है, वे आगे आकर उन्हें वापस लें।

प्रशासन का मानना है कि इस अभियान से एक ओर जहां पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सड़क हादसों में भी कमी आएगी। जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। शिमला जिले में शुरू किया गया यह अभियान प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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