Post by : Khushi Joshi
शिमला के संजौली क्षेत्र में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। मस्जिद को अवैध ठहराते हुए उसे गिराने के जिला अदालत के आदेशों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड ने अब नई याचिका दायर की है। इस याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट की एकलपीठ सुनवाई करेगी। इससे पहले वक्फ बोर्ड की ओर से दायर मुख्य रिट याचिका को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तकनीकी और प्रक्रियात्मक आधारों पर खारिज कर दिया था, जिसके बाद अब मामला एक बार फिर कानूनी रूप से शुरुआती स्तर पर लौट चुका है।
सोमवार को खंडपीठ—जिसमें न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा शामिल थे—के समक्ष वक्फ बोर्ड ने अपनी पुरानी याचिका को वापस लेने का आग्रह किया। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए वक्फ बोर्ड को उचित कानूनी आधारों पर नई याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान की। बोर्ड का कहना है कि जिला अदालत द्वारा 30 अक्तूबर को सुनाए गए फैसले में कई तथ्यात्मक और कानूनी त्रुटियाँ हैं, जिन पर अब विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पहले यह सवाल उठाया था कि याचिका में जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना निर्णय पर रोक लगाने की मांग कैसे की जा सकती है। इसके जवाब में वक्फ बोर्ड ने अतिरिक्त समय मांगा था और अदालत को आश्वस्त किया था कि नई याचिका में सभी आवश्यक पक्षकारों को शामिल किया जाएगा। अदालत ने बोर्ड के इस आश्वासन को मानते हुए पुरानी याचिका को निस्तारित कर दिया, जिससे अब मामला एकलपीठ के समक्ष नए सिरे से सुना जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संजौली मस्जिद विवाद लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। जिला अदालत ने मस्जिद के निर्माण को अवैध बताते हुए इसे ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर संवेदनशीलता बढ़ गई थी। वक्फ बोर्ड का दावा है कि मस्जिद का निर्माण वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया गया था और अदालत के निर्णय में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार नहीं किया गया।
मामले से जुड़े लोग आशंका जता रहे हैं कि यदि मस्जिद ढहाने का आदेश बरकरार रहता है तो क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। वहीं, प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार किया है और कहा है कि अदालत की ओर से आने वाले निर्णय के बाद ही आगे की कार्यवाही तय होगी।
हाईकोर्ट की एकलपीठ में होने वाली नई सुनवाई इस पूरे मामले का भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वक्फ बोर्ड उम्मीद कर रहा है कि नई याचिका में दिए गए तर्कों और तथ्यों के आधार पर अदालत पूर्व आदेशों पर पुनर्विचार करेगी। अब प्रदेश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह बहुचर्चित विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है और क्या अदालत किसी राहत के संकेत देती है या जिला अदालत के आदेश को बरकरार रखा जाएगा।
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