आईजीएमसी मरीज मारपीट केस: डॉक्टर राघव नरूला ने रखी अपनी बात
आईजीएमसी मरीज मारपीट केस: डॉक्टर राघव नरूला ने रखी अपनी बात

Post by : Mamta

Dec. 24, 2025 3:10 p.m. 452

शिमला के आईजीएमसी में मरीज से मारपीट के मामले पर अब आरोपी डॉक्टर डॉ. राघव नरूला खुद सामने आए हैं। उन्होंने अस्पताल के बेड पर लेटे हुए एक वीडियो जारी किया है, जिसमें वे भावुक नजर आ रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो पूरी घटना का केवल एक छोटा हिस्सा है, जबकि सच्चाई इससे अलग है। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर करीब 12 बजे अर्जुन सिंह नाम का मरीज उनके वार्ड में भर्ती हुआ था। रोज की प्रक्रिया के तहत वे मरीज की मेडिकल रिपोर्ट देखने और इलाज की योजना समझाने उसके बेड पर पहुंचे थे। उस समय मरीज फोन पर बात कर रहा था और सामान्य बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मरीज जाना-पहचाना सा लग रहा है, जिस पर मरीज अचानक नाराज हो गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा।

डॉक्टर ने माना कि बातचीत के दौरान उन्होंने ‘तू-तड़ाक’ शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन उनका कहना है कि इसमें कोई अपमान करने की मंशा नहीं थी। डॉक्टर के अनुसार मरीज ने बात को गलत समझा और उन पर आरोप लगाने लगा। उन्होंने कई बार मरीज को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन मरीज लगातार गुस्से में बोलता रहा। डॉक्टर का आरोप है कि मरीज ने न केवल उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि गालियां दीं और उनके परिवार को भी बीच में ले आया। वीडियो में डॉक्टर कहते हैं कि डॉक्टर भी इंसान होते हैं और उनसे हर स्थिति में चुप रहने की उम्मीद करना सही नहीं है।

डॉ. राघव नरूला का दावा है कि बहस बढ़ने के बाद पहले मरीज ने उन पर हमला किया। उनके अनुसार मरीज ने बेड का स्टैंड उठाकर मारने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की हुई और उन्हें चोटें आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उन्हें गंभीर चोट लग जाती, तो क्या तब भी सिर्फ डॉक्टर से ही संयम रखने की उम्मीद की जाती। डॉक्टर ने बताया कि वे पिछले आठ सालों से इसी अस्पताल में काम कर रहे हैं और हजारों मरीजों का इलाज कर चुके हैं, लेकिन ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।

गौरतलब है कि सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें डॉक्टर और मरीज के बीच मारपीट होती दिखी थी। इसके बाद अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया और मरीज के परिजनों ने प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर को ड्यूटी से हटा दिया और मरीज की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द कार्रवाई के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने भी स्पष्ट किया है कि मरीजों के साथ गलत व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

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