Post by : Ram Chandar
शिमला: हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। बोर्ड ने बताया कि बिजली खरीद लागत में लगातार वृद्धि होने के कारण अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। इसके चलते बोर्ड ने प्रस्तावित किया है कि प्रदेश में बिजली की दरें प्रति यूनिट 10 से 25 पैसे तक बढ़ाई जाएँ।
बिजली बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अगर खर्च और राजस्व के बीच अंतर को पूरा करना हो, तो अधिकतम 25 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। वहीं न्यूनतम 10 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि भी प्रस्तावित की गई है, ताकि आवश्यकतानुसार आयोग उचित निर्णय ले सके। बोर्ड ने यह भी बताया कि नई दरें आयोग द्वारा मार्च माह में अनुमोदित होने के बाद अप्रैल से प्रभावी रूप से लागू होंगी।
इस प्रस्ताव के दौरान राज्य बिजली बोर्ड, राज्य पावर कारपोरेशन, राज्य ट्रांसमिशन कारपोरेशन, शिमला के होटल एसोसिएशन और अन्य संबंधित संस्थाओं ने भी अपने सुझाव और आपत्तियां आयोग के समक्ष रखी। आयोग अब इन सभी सुझावों और आर्थिक आवश्यकताओं का विश्लेषण कर दरों के अंतिम निर्णय तक पहुंचेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली दरों में यह संभावित वृद्धि न केवल उपभोक्ताओं के लिए बल्कि उद्योगों, व्यवसायों और होटल व्यवसाय के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी। उपभोक्ताओं को आगामी महीनों में अपने बिजली बिलों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं उद्योग और होटल व्यवसाय अपनी लागत का पुनर्मूल्यांकन करेंगे और बजट में आवश्यक संशोधन करेंगे।
अधिकारी यह भी मानते हैं कि बिजली की लागत में यह वृद्धि सरकार और बिजली बोर्ड को वित्तीय संतुलन बनाए रखने में मदद करेगी। पिछले कुछ वर्षों में ईंधन और उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि होने के कारण यह कदम आवश्यक हो गया है। इससे बिजली उत्पादन, वितरण और संचालन की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहूलियत होगी।
राज्य विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय और सुझावों का गहन मूल्यांकन करेगा। आयोग का उद्देश्य उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना और बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है।
हिमाचल प्रदेश में बिजली दरों में यह प्रस्तावित वृद्धि उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए भविष्य में आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकती है। उपभोक्ताओं को सुझाव दिया गया है कि वे अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखें और अनावश्यक बिजली की बर्बादी से बचें। वहीं उद्योग और व्यवसाय अपने उत्पादन और संचालन की लागत का पुनर्मूल्यांकन करेंगे ताकि बढ़ी हुई दरों का प्रभाव न्यूनतम रहे।
इस प्रस्तावित वृद्धि के लागू होने के बाद बिजली बोर्ड के पास अतिरिक्त राजस्व उपलब्ध होगा, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन और वितरण की सुविधाओं में सुधार और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। बोर्ड और आयोग का यह कदम हिमाचल प्रदेश में बिजली की स्थिरता और सतत् आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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