Post by : Himachal Bureau
शिमला में आयोजित एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता सिस्टर शिवानी के ध्यान एवं प्रवचन सत्र में भाग लिया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को आध्यात्मिक जागरूकता, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित करना था।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों का जीवन अत्यंत व्यस्त और प्रतिस्पर्धात्मक हो गया है। भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में व्यक्ति अक्सर मानसिक तनाव, चिंता और असंतोष का अनुभव करता है। ऐसे समय में आध्यात्मिकता व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लंबे समय से समाज में नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास, आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। संस्था द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम लोगों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं और उन्हें आत्मिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि सिस्टर शिवानी के विचारों और संदेशों ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। उनके सरल और व्यावहारिक संदेश लोगों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि सच्ची खुशी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के विचारों, मूल्यों और जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण से उत्पन्न होती है।
कार्यक्रम के दौरान परिवारिक संबंधों, संवाद कौशल, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्म-सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन जीने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे विचारों और शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सही दिशा देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भीतर से शांत और मजबूत होता है, वह समाज और राष्ट्र के विकास में अधिक सकारात्मक योगदान दे सकता है। आध्यात्मिकता लोगों में सहिष्णुता, करुणा, सामंजस्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करती है। यही गुण एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज की नींव बनते हैं।
इस अवसर पर सिस्टर शिवानी ने राज्यपाल का सम्मान किया। वहीं राज्यपाल ने भी उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति, श्रद्धालु और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान आध्यात्मिक चिंतन, आत्मिक विकास और सामाजिक समरसता का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। उपस्थित लोगों ने जीवन में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति ही जीवन की वास्तविक सफलता और संतोष का आधार हैं।
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