आईजीएमसी हिंसा मामला: वीडियो मिटाने की कोशिश, परिजनों के गंभीर आरोप
आईजीएमसी हिंसा मामला: वीडियो मिटाने की कोशिश, परिजनों के गंभीर आरोप

Post by : Khushi Joshi

Dec. 24, 2025 3:02 p.m. 524

शिमला स्थित इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में मरीज के साथ हुई मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण में अब पीड़ित के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के स्वजनों ने पुलिस अधीक्षक शिमला से मुलाकात कर दावा किया है कि घटना के दौरान न केवल मरीज के साथ मारपीट की गई, बल्कि मौजूद कुछ कर्मचारियों ने साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास किया।

पीड़ित अर्जुन पंवार के परिजनों द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र में कहा गया है कि चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उस समय मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और वह पूरी तरह ऑक्सीजन पर निर्भर था। आरोप है कि इसी दौरान संबंधित डॉक्टर द्वारा जानबूझकर मरीज की ऑक्सीजन पाइप को क्षतिग्रस्त किया गया और नाक व छाती जैसे संवेदनशील अंगों पर बार-बार प्रहार किया गया, जिससे मरीज की जान को सीधा खतरा पैदा हुआ।

परिजनों का कहना है कि यदि घटना का वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया गया होता तो यह पूरा मामला दबा दिया जाता और अस्पताल स्टाफ की कथित भूमिका कभी सामने नहीं आ पाती। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जैसे ही वीडियो बनाया जाने लगा, वैसे ही कुछ डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों ने मोबाइल फोन छीनने और वीडियो डिलीट कराने का प्रयास किया। परिजनों का दावा है कि साक्ष्य मिटाने की यह कोशिश खुद में एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।

इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित के पिता का दर्द भी सामने आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जब उन्होंने अपने बेटे के साथ हुई मारपीट को देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं दूसरी ओर, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर कहा कि किसी भी घटना को केवल एक पक्ष के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों पक्षों को सुना जाना जरूरी है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।

आईजीएमसी में सामने आया यह मामला अब केवल एक मारपीट की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, पेशेवर आचरण और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस प्रशासन ने शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ा दी है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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