सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले छात्र के परिवार के हक में कोर्ट का फैसला
सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले छात्र के परिवार के हक में कोर्ट का फैसला

Post by : Himachal Bureau

May 27, 2026 2:42 p.m. 185

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, सुंदरनगर ने एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। इस फैसले में अदालत ने बीमा कंपनी को बड़ा झटका देते हुए सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र के परिवार के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह मृतक के माता-पिता को 14,44,800 रुपये का मुआवजा अदा करे।

यह मामला वर्ष 2019 का है, जब 21 अक्टूबर की रात लगभग 12 बजे सुंदरनगर के धनोटू क्षेत्र के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में 18 वर्षीय अविनाश तरोट, जो कि कनैड़ स्थित एक शिक्षण संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के तीसरे सेमेस्टर का छात्र था, अपनी जान गंवा बैठा था। उस रात वह अपने मित्र मयंक के साथ मोटरसाइकिल पर यात्रा कर रहा था।

धनोटू के पास उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर फिसल गई, जिससे गंभीर दुर्घटना हो गई। हादसे में अविनाश के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उसकी मौके पर ही या इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और माता-पिता ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

बीमा कंपनी ने इस मामले में मुआवजा देने से बचने की कोशिश की और अदालत में कई तर्क प्रस्तुत किए। कंपनी की ओर से कहा गया कि दुर्घटना के समय बाइक चालक नशे में था और वाहन पर ट्रिपल राइडिंग हो रही थी, साथ ही हेलमेट नहीं पहना गया था। हालांकि अदालत ने इन सभी दलीलों को अस्वीकार कर दिया और कहा कि बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत तर्क पर्याप्त और प्रमाणिक नहीं हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने सभी साक्ष्यों और गवाहों की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि इस मामले में मुआवजा देने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की है। अदालत ने यह भी माना कि पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।

मृतक के माता-पिता ने पहले अदालत में लगभग 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी, लेकिन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने 14,44,800 रुपये का मुआवजा तय किया। इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यह राशि याचिका दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दी जाएगी। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और सड़क दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

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