Author : Bhardwaj Mandi. (HP) Mandi. HP
मंडी सदर बाल विकास परियोजना के अंतर्गत पोषण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण जिला परिषद के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया जा रहा है, जो 26 दिसंबर से आरंभ होकर तीन दिनों तक चलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल शिक्षा और पोषण सेवाओं को एकीकृत रूप से सशक्त बनाना है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी मंडी सदर जितेन्द्र सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के पहले चरण में वृत्त टारना, सदर और तल्याहड़ क्षेत्रों में कार्यरत लगभग 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंडी सदर परियोजना क्षेत्र में कुल 479 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं और इनमें सेवाएं दे रही सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चरणबद्ध तरीके से 100-100 के बैच में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम के अंतर्गत आधारशिला को मुख्य पाठ्यचर्या रूपरेखा के रूप में अपनाया गया है। इस पाठ्यचर्या में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए खेल आधारित और गतिविधि आधारित शिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और भाषाई विकास संतुलित रूप से हो सके। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों के समग्र विकास का आकलन करने के लिए निर्धारित विकासात्मक मानकों की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
जितेन्द्र सैनी ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत नवचेतना घटक पर विशेष फोकस किया गया है, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़ा हुआ है। इसके तहत उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, बाल मनोविज्ञान की बुनियादी समझ, व्यवहारिक शिक्षण तकनीकों और बच्चों की सीखने की क्षमता को पहचानने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। साथ ही अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने, शिक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने और ई-लर्निंग व डेटा प्रबंधन के लिए डिजिटल साक्षरता को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कौशल को मजबूत करना और उन्हें केवल सेविका ही नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षक की भूमिका के लिए भी सक्षम बनाना है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और पोषण के साथ-साथ उनकी सीखने की क्षमता में भी सुधार आएगा। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जमीनी स्तर पर बाल विकास सेवाओं की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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