Author : Prem Sagar
सैंज घाटी के कोठी शैंशर क्षेत्र के दरमेढ़ा गांव में देव आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब प्रेमचंद को विधिवत रूप से देवता पांचवीर के कारदार के रूप में ताजपोशी कर कार्यभार सौंपा गया। इस शुभ अवसर पर पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल बन गया और हारियानों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
ताजपोशी समारोह पूरी पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ। देवता के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद प्रेमचंद को कारदार पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने देवता के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया और नए कारदार के सफल कार्यकाल की कामना की।
इस अवसर को और भी विशेष बनाने के लिए प्रेमचंद द्वारा एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में सेवा, समर्पण और श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जिससे यह कार्यक्रम एक बड़े सामाजिक और धार्मिक उत्सव के रूप में परिवर्तित हो गया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें तीन प्रमुख देवरथों की पावन उपस्थिति रही। देवता पांचवीर सेरी सुचैहन, देवता भंभू (भैरव कथैउगी) और देवता पांचवीर वनोगी देहुरी के देवरथ इस समारोह में शामिल हुए और उन्होंने अपनी पावन उपस्थिति से आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। इन देवरथों की मौजूदगी में प्रेमचंद को आशीर्वाद प्रदान किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना।
इसके साथ ही स्थानीय देवता थान की तपोस्थली में भव्य देव मिलन का आयोजन भी किया गया। इस देव मिलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं और हारियानों ने भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच देव संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक मान्यताओं को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।
सैंज घाटी में देव संस्कृति की यह अनूठी परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें देवताओं के प्रति लोगों की अटूट आस्था और विश्वास झलकता है। प्रेमचंद की कारदार के रूप में ताजपोशी इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। इस पूरे आयोजन ने क्षेत्र में एक विशेष छाप छोड़ी है और लोगों के मन में लंबे समय तक इसकी यादें ताजा रहेंगी। देव आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक एकता का यह संगम सैंज घाटी की पहचान को और मजबूत करता है।
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