दो साल बाद भी नहीं बना पुल, उफनती नदी में देवताओं को पार कराना पड़ा
दो साल बाद भी नहीं बना पुल, उफनती नदी में देवताओं को पार कराना पड़ा

Author : Prem Sagar

March 30, 2026 11:21 a.m. 159

सैंज घाटी के दरमेढ़ा गांव में एक बार फिर आस्था और मजबूरी का अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहां देव कार्य के लिए पहुंचे देवताओं के देवरथों को हारियानों ने उफनती नदी की तेज धारा के बीच सुरक्षित पार करवाया। यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि वर्ष 2023 की भीषण बाढ़ में बहा पुल आज तक दोबारा नहीं बन पाया है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के बाद उन्होंने अपने स्तर पर दो बार अस्थायी पुल बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार तेज बहाव के कारण वह पुल टिक नहीं पाया और बह गया। पुल के अभाव में दरमेढ़ा और आसपास के गांवों के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

शनिवार को देहुरी गांव से देवता वीर, कथैउगी गांव से देवता भंभू (भैरव) और सेरी सुचैहन गांव से देवता वीर अपने हारियानों के साथ देव कार्य के लिए दरमेढ़ा पहुंचे। इस दौरान जब नदी को पार करने की स्थिति आई, तो हारियानों ने साहस और श्रद्धा का परिचय देते हुए तेज बहाव के बीच देवताओं के देवरथों को सुरक्षित नदी पार करवाया। यह दृश्य देखने वालों के लिए बेहद भावुक और श्रद्धा से भर देने वाला था।

इस घटना ने एक ओर जहां लोगों की आस्था और परंपरा को दर्शाया, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को भी उजागर किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल न होने के कारण न केवल धार्मिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, बीमारों को समय पर अस्पताल पहुंचाना और दैनिक उपयोग का सामान लाना भी बहुत कठिन हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार प्रशासन को इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। ऐसे में लोगों को हर दिन जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द यहां स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सके। उनका कहना है कि पुल बनने से न केवल आवाजाही आसान होगी, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी। यह घटना यह भी दर्शाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी कई मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। आस्था के साथ-साथ उनकी यह मजबूरी भी एक सच्चाई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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