Author : Rajesh Vyas
पंचरुखी क्षेत्र का ऐतिहासिक सल्याणा छिंज मेला करीब 200 वर्षों से लगातार मनाया जा रहा है और यह आज इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। यह मेला हर साल बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इस मेले के माध्यम से न केवल मनोरंजन होता है, बल्कि लोगों को अपनी पुरानी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने का भी अवसर मिलता है।
इस वर्ष भी मेले का आयोजन धूमधाम से किया गया, जिसमें आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल तथा कानून मंत्री यादविंद्र गोमा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोगों को मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के पारंपरिक आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ऐसे मेलों को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे जुड़ी रहें।
मेले का शुभारंभ पारंपरिक शोभायात्रा के साथ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इसके बाद मंत्री ने अखाड़े में पहुंचकर कुश्ती प्रतियोगिताओं का विधिवत शुभारंभ किया। छिंज मेले की मुख्य आकर्षण कुश्ती होती है, जिसमें दूर-दूर से आए पहलवान अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन करते हैं। दर्शकों ने इन मुकाबलों का भरपूर आनंद लिया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
मंत्री यादविंद्र गोमा ने बताया कि मेले के मैदान को बेहतर बनाने और उसे चौड़ा करने के लिए सरकार द्वारा धनराशि खर्च की गई है। इसके साथ ही अखाड़े को भी नया स्वरूप दिया गया है, ताकि आयोजन को और व्यवस्थित और आकर्षक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और दर्शकों को भी मेले का आनंद लेने में आसानी होगी।
मेले के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना और झंडा रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा प्रदर्शनियां भी लगाई गईं, जिनका मंत्री ने निरीक्षण किया और अधिकारियों से योजनाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने मेले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सल्याणा छिंज मेला न केवल एक आयोजन है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह मेला लोगों को एक साथ लाकर आपसी भाईचारे को बढ़ावा देता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।
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