Post by : Himachal Bureau
रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति सहित ऊंचे हिमालयी इलाकों में कई ग्लेशियर लगातार पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही ग्लेशियर झीलों के आकार और जलस्तर में होने वाले बदलावों की नियमित निगरानी जरूरी मानी जा रही है। ऐसी झीलों में अचानक बड़ी मात्रा में पानी निकलने की स्थिति नीचे की घाटियों, नदी किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
जब ग्लेशियर पिघलता और पीछे हटता है तो उसके सामने बने गड्ढों में पानी जमा होना शुरू हो सकता है। कई बार यह पानी बर्फ, मिट्टी, चट्टानों और मलबे से बने प्राकृतिक अवरोध के पीछे जमा रहता है। यदि प्राकृतिक बांध कमजोर हो जाए, भूस्खलन हो या बर्फ अथवा चट्टान का बड़ा हिस्सा झील में गिर जाए, तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है।
Read Also: FADA हिमाचल की कमान राजेंद्र वशिष्ट के हाथ, 2026–28 तक करेंगे ऑटो डीलरों का प्रतिनिधित्व
कुल्लू प्रशासन के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा की स्थिति को देखते हुए सर्वे और निगरानी का काम किया जा रहा है। बासुकी झील और लाहौल-स्पीति की घेपन झील जैसे क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जलविद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़ने से पहले हूटर और अन्य चेतावनी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि नदी और नालों के आसपास मौजूद लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी राज्यों में रियल टाइम मॉनिटरिंग, मौसम संबंधी आंकड़ों की साझेदारी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है। ऊंचाई वाले इलाकों में सेंसर, सैटेलाइट निगरानी और स्थानीय स्तर पर चेतावनी प्रणाली विकसित करने से अचानक आने वाली बाढ़ के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए अधिक समय मिल सकता है।
हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता निर्माण, पहाड़ों की कटिंग, फोरलेन परियोजनाएं और नदी किनारे बढ़ती आबादी भी जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण से पहले भूगर्भीय स्थिति, ढलान की स्थिरता, जल निकासी और भूस्खलन के खतरे का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। संवेदनशील नदी तटों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में हाल के वर्षों में मानसून के दौरान अचानक बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर मानवीय गतिविधियों का असर भी जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे में केवल आपदा के बाद राहत कार्य पर्याप्त नहीं होंगे। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नियमित वैज्ञानिक सर्वे, निर्माण नियमों का पालन और लोगों को समय रहते चेतावनी देना भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
पर्यावरण और भूगोल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न विभागों और राज्यों के बीच डेटा शेयरिंग मजबूत होनी चाहिए। इसके साथ ही नदियों के किनारे और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण नियमों का सख्ती से पालन कराने तथा स्थानीय लोगों को संभावित प्राकृतिक खतरों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। हिमालय में ग्लेशियरों और ग्लेशियर झीलों में हो रहे बदलाव इस बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और वैज्ञानिक योजना को प्राथमिकता देना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इ...
Hamirpur स्थापना दिवस पर जानें जिले का इतिहास, वीरभूमि की पहचान, कटोच वंश और 1 सितंबर 1972 को जिला ब
बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक ...
कुल्लू के बिजली महादेव मंदिर में Rotary Club और रोवर्स-रेंजर्स ने सफाई अभियान चलाया। करीब 2 क्विंटल
हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें न...
हिमाचल में Swine Flu के मामले बढ़े। जानें H1N1 Symptoms, बचाव, इलाज और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूर
नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी कि...
Nepal Flood के बीच हमीरपुर प्रशासन अलर्ट, नेपाल गए परिजनों से संपर्क न होने पर तुरंत अधिकारियों को स
मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंब...
Manimahesh Yatra 2026 के पहले दिन 253 श्रद्धालु रवाना हुए। Heli Taxi सेवा भी शुरू, 20 सितंबर तक चलेग
हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंद...
हिमाचल में Swine Flu के 4 मामले मिले। जानें H1N1 Virus के लक्षण, बचाव के उपाय और कब लेनी चाहिए डॉक्ट
हथलौंण की बेटी शिल्पा सोनी का चयन, बंगाणा में बनेंगी रसायन प...
हथलौंण की शिल्पा सोनी ने Commission Exam पास कर Lecturer Chemistry पद हासिल किया, बंगाणा विद्यालय मे