Author : Pawan Kumar
शिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर देवता श्री खुड़ी जहल 12 फरवरी को अपने स्थान से विधिवत रूप से यात्रा पर रवाना होंगे। यह यात्रा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं से जुड़ी हुई है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। देवता श्री खुड़ी जहल की यह यात्रा हर वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित की जाती है और इसे स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, देवता श्री खुड़ी जहल 12 फरवरी को अपने मूल स्थान से प्रस्थान करेंगे और विभिन्न गांवों से होते हुए अंततः शिवरात्रि महोत्सव के लिए निर्धारित स्थल पर पहुंचेंगे। इस दौरान देवता की पालकी को पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सजाया जाएगा। यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगा।
देवता श्री खुड़ी जहल की मान्यता सैकड़ों वर्षों पुरानी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि देवता की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है। कहा जाता है कि देवता हर वर्ष अपने भक्तों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनते हैं और उनका समाधान करते हैं। इसी कारण शिवरात्रि के दौरान देवता के दर्शन के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इतिहासकारों और बुजुर्गों के अनुसार, देवता मूल बुढ़ाढाल की यह यात्रा लगभग 130 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा होती है। इस दौरान देवता की पालकी को कंधों पर उठाकर भक्त पहाड़ी रास्तों, जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि लोगों के साहस, समर्पण और एकता को भी दर्शाती है।
मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन देवता श्री खुड़ी जहल भगवान शिव की विशेष आराधना करते हैं। इसी कारण शिवरात्रि पर्व पर इस यात्रा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन देवता के दर्शन करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
देवता श्री खुड़ी जहल से जुड़ी यह परंपरा लगभग 500 वर्षों से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा आज तक निभाई जा रही है। हर वर्ष क्षेत्र के लोग पूरे श्रद्धा भाव से इस यात्रा में भाग लेते हैं और देवता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध परंपराओं को भी दर्शाती है। देवता श्री खुड़ी जहल की यह यात्रा क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था, विश्वास और परंपरा का जीवंत उदाहरण मानी जाती है।
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