Author : Rajesh Vyas
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुधीर शर्मा ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, असत्य और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज की गई कार्रवाई तथ्यों और कानून के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से की गई है। सुधीर शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का उद्देश्य उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना और राजनीतिक रूप से उन्हें कमजोर करना है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और इसका मकसद केवल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को बदनाम करना है।
विधायक ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में Sudhir Sharma, Vigilance FIR, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और राजनीतिक प्रतिशोध जैसे मुद्दों पर हमेशा पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि उनकी आय, चल एवं अचल संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन का पूरा विवरण समय-समय पर संबंधित वैधानिक संस्थाओं, आयकर विभाग और निर्वाचन आयोग के समक्ष नियमानुसार प्रस्तुत किया जाता रहा है। उनके अनुसार उनकी प्रत्येक संपत्ति और वित्तीय स्रोत पूरी तरह वैध और दस्तावेजों से प्रमाणित हैं।
सुधीर शर्मा ने कहा कि किसी भी एफआईआर का दर्ज होना केवल जांच प्रक्रिया की शुरुआत होती है। इसे किसी भी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक और कानूनी आधार पर जवाब मौजूद है। उन्होंने विश्वास जताया कि निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सभी तथ्य सामने आएंगे तथा उनकी बेगुनाही सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है।
विधायक ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए कई निष्कर्ष अनुमान और अधूरी जानकारी पर आधारित हैं। इसलिए वे पूरी कार्रवाई की वैधानिकता और औचित्य को सक्षम न्यायालय में चुनौती देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय का दरवाजा खटखटाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसे किसी भी प्रकार से जांच में बाधा उत्पन्न करने के रूप में प्रस्तुत करना गलत और भ्रामक है।
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सुधीर शर्मा ने कहा कि वे कानून के दायरे में रहकर हर जांच में पूरा सहयोग करेंगे और साथ ही अपनी प्रतिष्ठा तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सत्य अंततः सामने आएगा और न्यायिक प्रक्रिया के बाद वास्तविक तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया और आम लोगों से अपील की कि किसी भी अप्रमाणित आरोप के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचें तथा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाना चाहिए।
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