Post by : Khushi Joshi
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में सिरमौर जिला एक बार फिर आस्था और विश्वास का साक्षी बना है। गिरिपार क्षेत्र की पावन धरती पर छत्रधारी चालदा महासू महाराज की जातर यात्रा के आगमन ने एक नया अध्याय जोड़ दिया। उत्तराखंड से आरंभ हुई यह ऐतिहासिक यात्रा हजारों श्रद्धालुओं के साथ रविवार तड़के सिरमौर जिला के पहले पड़ाव द्राबिल पहुंची, जहां न्याय के देवता के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के दसऊ क्षेत्र से आठ दिसंबर को शुरू हुई यह पैदल जातर यात्रा रविवार सुबह करीब तीन बजे द्राबिल पहुंची। हालांकि सिरमौर सीमा में प्रवेश सायं के समय हो गया था, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण यात्रा को अपने पहले पड़ाव तक पहुंचने में असाधारण समय लगा। उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा से लेकर द्राबिल तक लगभग आठ किलोमीटर का सफर तय करने में करीब नौ घंटे का समय लगा, क्योंकि नेशनल हाईवे-707ए पर श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि पैदल चलना भी चुनौती बन गया था।
जैसे ही छत्रधारी चालदा महासू महाराज की पालकी द्राबिल पहुंची, पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया। यहां बोठा महासू महाराज की पालकी के साथ चालदा महासू महाराज का पारंपरिक मिलन कराया गया, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु देर रात तक उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान जयकारों और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
इस जातर यात्रा में हिमाचल और उत्तराखंड के करीब 60 से 70 हजार श्रद्धालु शामिल बताए जा रहे हैं। सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की यह यात्रा लोगों के लिए आस्था और न्याय का प्रतीक बनकर उभरी है। रविवार दोपहर करीब तीन बजे द्राबिल से पश्मी गांव की ओर यात्रा पुनः आरंभ हुई, जिसमें छत्रधारी चालदा महासू महाराज का छत्र और पालकी श्रद्धालुओं की अगुवाई में आगे बढ़े। लगभग 16 किलोमीटर की इस कठिन पैदल यात्रा को पूरा करने में करीब 12 घंटे का समय लगने का अनुमान है।
इस पावन यात्रा में हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और नाहन के विधायक अजय सोलंकी भी विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ चलकर धार्मिक आस्था में सहभागिता निभाई और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया। यह जातर यात्रा सोमवार तड़के पश्मी गांव में नवनिर्मित महासू महाराज मंदिर पहुंचेगी, जहां विधिवत धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
पश्मी गांव में सोमवार को एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जो इस यात्रा का मुख्य आकर्षण रहेगा। अनुमान है कि इस भंडारे में करीब 80 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जाएगा। इसके लिए आसपास के लगभग 750 गांवों से स्वयंसेवक और कारीगर सेवा में जुटे हुए हैं। पहली बार पश्मी गांव पहुंच रही चालदा महासू महाराज की जातर को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
गिरिपार क्षेत्र में इस यात्रा से जुड़ी एक पुरानी आस्था भी लोगों के बीच चर्चा में है। वर्ष 2020 में उत्तराखंड के दसऊ से पश्मी गांव तक एक विशाल बकरे का पहुंचना महासू महाराज के आगमन का संकेत माना गया था। शुरुआत में इसे साधारण घटना समझा गया, लेकिन बाद में इसे धार्मिक संकेत के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने करीब दो करोड़ रुपये की लागत से महासू महाराज मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, जो आज इस ऐतिहासिक जातर यात्रा का केंद्र बना हुआ है।
छत्रधारी चालदा महासू महाराज की यह जातर यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हिमाचल और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और परंपराओं के संरक्षण का जीवंत उदाहरण भी बन गई है।
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