राजगढ़ में टमाटर के दाम गिरे, किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल
राजगढ़ में टमाटर के दाम गिरे, किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल

Author : Gopal Dutt Sharma

July 22, 2026 2:47 p.m. 123

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में इस समय टमाटर उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े टमाटर उत्पादक इलाकों में शामिल राजगढ़ में इस वर्ष अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में टमाटर के लगातार गिरते दामों ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अनेक किसानों ने खेतों से टमाटर तोड़ना तक बंद कर दिया है क्योंकि मंडी तक फसल पहुंचाने का खर्च भी वसूल नहीं हो पा रहा। किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो टमाटर की खेती उनके लिए घाटे का सौदा साबित होगी।

लागत से भी कम मिल रहा मूल्य

राजगढ़ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था काफी हद तक टमाटर की खेती पर निर्भर करती है। यहां से बड़ी मात्रा में टमाटर दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तर भारत की प्रमुख मंडियों में भेजा जाता है। लेकिन इस समय मंडियों में एक क्रेट टमाटर के केवल 250 से 400 रुपये तक मिल रहे हैं। एक क्रेट में लगभग 20 से 25 किलो टमाटर पैक किया जाता है। किसानों के अनुसार केवल परिवहन पर ही दिल्ली तक करीब 130 रुपये और चंडीगढ़ तक लगभग 70 रुपये प्रति क्रेट खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा मजदूरी, पैकिंग, ढुलाई और अन्य खर्च अलग से उठाने पड़ते हैं। ऐसे में बची हुई राशि लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं रहती। इस पूरे मामले में टमाटर के दाम, किसान, राजगढ़, हिमाचल प्रदेश, Tomato Price जैसे विषय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे खेती का भविष्य संकट में दिखाई दे रहा है।

खेती में लाखों का निवेश, लेकिन नहीं मिल रहा उचित दाम

टमाटर की खेती आसान नहीं मानी जाती। किसानों को फसल तैयार करने के लिए शुरुआत से ही भारी निवेश करना पड़ता है। पौध खरीदने, खेत तैयार करने, सिंचाई, खाद, कीटनाशकों, बांस, रस्सी, निराई-गुड़ाई और मजदूरी पर लगातार खर्च करना पड़ता है। लगभग तीन महीने की मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तब किसानों को उम्मीद रहती है कि उन्हें अच्छा मूल्य मिलेगा, लेकिन इस बार बाजार के हालात ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों का कहना है कि वर्तमान दामों पर फसल बेचने से न तो लागत निकल रही है और न ही परिवार का खर्च चलाना संभव हो पा रहा है। इससे अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होने लगी है।

बाहरी राज्यों से आवक बढ़ने से बिगड़ा बाजार

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस बार दक्षिण भारत के बेंगलुरु और अन्य राज्यों से समय से पहले बड़ी मात्रा में टमाटर की आवक होने के कारण दिल्ली और चंडीगढ़ जैसी प्रमुख मंडियों में आपूर्ति बढ़ गई है। अधिक आपूर्ति के कारण मांग और कीमतों का संतुलन बिगड़ गया, जिसका सीधा असर हिमाचल के किसानों पर पड़ा।व्यापारियों का भी कहना है कि जब तक बाहरी राज्यों से आने वाली फसल की मात्रा कम नहीं होगी, तब तक टमाटर के दामों में उल्लेखनीय सुधार की संभावना कम दिखाई देती है।

कई किसानों ने बंद की फसल की तुड़ाई

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई किसानों ने खेतों से टमाटर तोड़ना ही बंद कर दिया है। उनका कहना है कि यदि मंडी तक माल भेजने में ही घाटा हो रहा है तो फसल बेचने का कोई लाभ नहीं है। कई किसान सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी समस्या सरकार और आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रगतिशील किसानों का कहना है कि वर्तमान मूल्य किसानों के साथ न्याय नहीं कर रहे और खेती लगातार घाटे का व्यवसाय बनती जा रही है।

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खुदरा बाजार और मंडी के भाव में बड़ा अंतर

किसानों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंडी में जिस टमाटर का मूल्य उन्हें मुश्किल से 10 से 20 रुपये प्रति किलो के बराबर मिल रहा है, वही टमाटर खुदरा बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। इस बड़े मूल्य अंतर का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा। किसानों का कहना है कि बिचौलियों और बाजार व्यवस्था के कारण उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। टमाटर उत्पादकों ने सरकार और कृषि विपणन विभाग से मांग की है कि किसानों को उचित समर्थन मूल्य या प्रभावी विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ी संख्या में किसान टमाटर की खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं, जिसका असर पूरे राजगढ़ क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

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