Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान मक्की की फसल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। लगातार बदल रहे मौसम और कीटों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जिला स्तर पर गठित विशेषज्ञ टीम विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर खेतों का निरीक्षण कर रही है ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके। मक्की की फसल में फॉल आर्मीवर्म के संभावित खतरे को देखते हुए किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ आवश्यक तकनीकी सलाह भी दी जा रही है। हाल ही में कृषि विशेषज्ञों ने कई खेतों का निरीक्षण किया, जहां प्रारंभिक स्तर पर कीट का प्रभाव देखने को मिला। अधिकारियों के अनुसार अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो यह कीट तेजी से पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी कारण विभाग ने किसानों को नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस कीट का सबसे पहला प्रभाव पत्तियों पर दिखाई देता है। शुरुआत में पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद बनते हैं, जो बाद में बड़े और अनियमित आकार के हो जाते हैं। इसके बाद कीट पौधे की मध्यकली में प्रवेश कर अंदर ही अंदर फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसलिए फॉल आर्मीवर्म की पहचान होते ही तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाना आवश्यक है।
कृषि विभाग ने सलाह दी है कि यदि खेत में कीट का प्रभाव सीमित मात्रा में दिखाई दे तो नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं अधिक प्रकोप की स्थिति में कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुमोदित दवाओं का निर्धारित मात्रा में छिड़काव किया जाए। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को भी जैविक घोल तैयार कर नियमित अंतराल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है, जिससे फसल को सुरक्षित रखा जा सके।
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कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें। यदि पत्तियों पर छेद, पौधों की मध्यकली में कीट या उसका मल दिखाई दे तो बिना देरी किए कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र अथवा संबंधित कृषि अधिकारियों से संपर्क करें। विभाग का कहना है कि समय पर पहचान और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण करने पर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की सहायता के लिए विशेषज्ञ टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय है और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों के लिए एडवाइजरी का उद्देश्य फसल को सुरक्षित रखना और उत्पादन में संभावित नुकसान को कम करना है।
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