Author : Rajesh Vyas
पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के इस प्रतिष्ठित कृषि संस्थान की लगातार गिरती साख पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2023 के बाद से विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जबकि अब रजिस्ट्रार का पद भी रिक्त है। इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था, शैक्षणिक गतिविधियों और अनुसंधान कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की पहचान केवल उसके भवनों या परिसरों से नहीं होती, बल्कि उसकी कार्यकुशल प्रशासनिक व्यवस्था, दूरदर्शी नेतृत्व और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से होती है। लंबे समय तक नियमित नेतृत्व का अभाव किसी भी विश्वविद्यालय के विकास को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि Vice Chancellor की नियुक्ति में हो रही देरी के कारण विश्वविद्यालय के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लंबित पड़े हैं और नई योजनाओं के क्रियान्वयन की गति भी प्रभावित हुई है।
प्रवीन कुमार ने विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालय के हेल्थ सेंटर में कोई नियमित चिकित्सक तैनात नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी और वैज्ञानिक भी इसी परिसर में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र, कर्मचारी या अधिकारी की अचानक तबीयत खराब हो जाए तो तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होना अत्यंत गंभीर विषय है। एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में इस प्रकार की स्थिति न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है बल्कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है।
पूर्व विधायक के अनुसार किसी भी Agricultural University की पहचान उसके शोध, नवाचार और किसानों के लिए विकसित की जाने वाली तकनीकों से होती है। लेकिन जब विश्वविद्यालय में नियमित नेतृत्व नहीं होता तो शोध परियोजनाओं की स्वीकृति, नई योजनाओं का संचालन, वित्तीय निर्णय और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की भागीदारी भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय ने वर्षों तक देशभर में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। यहां से पढ़े हुए वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे संस्थान की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्रदेश के किसानों के हित भी प्रभावित हो रहे हैं।
प्रवीन कुमार ने कहा कि उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के भीतर कार्यरत कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और शिक्षाविद वर्तमान माहौल से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि शैक्षणिक वातावरण में अनिश्चितता के कारण शोध कार्यों की गति प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कई अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच भी विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता का माहौल है। यदि किसी संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था लंबे समय तक अस्थिर बनी रहती है तो उसका सीधा प्रभाव नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के विश्वास पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय अत्यंत आवश्यक होते हैं। यदि महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक खाली रहें तो संस्थान की कार्यक्षमता स्वाभाविक रूप से प्रभावित होती है।
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश में योग्य और अनुभवी वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश्वर चंदेल ने प्रदेश में Natural Farming को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली और अनुभव के आधार पर उन्हें पहले डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी-सोलन का कुलपति नियुक्त किया गया तथा निर्धारित कार्यकाल पूरा करने के बाद उनकी योग्यता को देखते हुए गुजरात में भी कुलपति की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में योग्य नेतृत्व उपलब्ध है, आवश्यकता केवल समय पर उचित चयन प्रक्रिया पूरी करने की है।
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सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील
प्रवीन कुमार ने प्रदेश सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति को गंभीरता से लिया जाए और नियमित कुलपति सहित अन्य रिक्त प्रशासनिक पदों पर जल्द नियुक्तियां की जाएं। उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों का विश्वास भी बहाल होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के लिए कृषि विश्वविद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई कृषि तकनीकों, आधुनिक अनुसंधान और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में इस संस्थान की बड़ी जिम्मेदारी है। अंत में उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था, अनुसंधान क्षमता और प्रभावी प्रशासन से होती है। यदि समय रहते आवश्यक निर्णय नहीं लिए गए तो इसका प्रभाव केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के कृषि क्षेत्र, विद्यार्थियों और भविष्य के अनुसंधान पर भी पड़ सकता है।
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