Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। प्रदेश में लगातार बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं से हुए नुकसान की भरपाई तथा पुनर्वास कार्यों को गति देने के लिए राज्य आपदा राहत कोष से बड़ी राशि जारी करने की मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिले और क्षतिग्रस्त आधारभूत ढांचे को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। हिमाचल आपदा राहत को लेकर सरकार ने सभी जिलों और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
सरकार द्वारा स्वीकृत कुल 200 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग प्रदेश के सभी जिलों और आवश्यक सरकारी विभागों के माध्यम से किया जाएगा। इस धनराशि का बड़ा हिस्सा जिला प्रशासन के माध्यम से खर्च किया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके। इसके अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग को भी अलग से बजट उपलब्ध कराया गया है ताकि क्षतिग्रस्त सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं जल्द से जल्द बहाल की जा सकें। सरकार का मानना है कि समय पर संसाधन उपलब्ध होने से राहत कार्यों की गति बढ़ेगी और लोगों को राहत मिलेगी। एसडीआरएफ की इस राशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों पर ही किया जाएगा।
जिला स्तर पर राहत राशि का वितरण आपदा की गंभीरता, भौगोलिक परिस्थितियों और हुए नुकसान को ध्यान में रखकर किया गया है। सबसे अधिक बजट मंडी जिले को उपलब्ध कराया गया है क्योंकि हाल के वर्षों में यह जिला प्राकृतिक आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित रहा है। इसके अलावा कांगड़ा, शिमला, सिरमौर, चंबा, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और सोलन को भी उनकी आवश्यकता के अनुसार राशि प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में अतिरिक्त आवश्यकता महसूस होती है तो परिस्थितियों के अनुसार और सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। इसमें प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण, सड़कों और पुलों की बहाली, पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य करना, जल निकासी प्रणाली की मरम्मत, सार्वजनिक सुविधाओं की बहाली तथा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। राहत राशि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा और प्रत्येक खर्च का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
सरकार ने राहत वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सहायता राशि सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और प्रभावित लोगों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी। साथ ही सभी जिलों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक पोर्टल और अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सहायता राशि भेजने का उद्देश्य राहत वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राहत कोष से खर्च की जाने वाली प्रत्येक राशि निर्धारित नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी द्वारा तय मानकों से अधिक खर्च किया जाता है या राशि का दुरुपयोग होता है तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। सभी स्वीकृत कार्यों और खर्च का पूरा विवरण संबंधित सरकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। राहत कार्य पूरा होने के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र भी समय पर प्रस्तुत करना होगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले विभागों और जिलों के विरुद्ध भविष्य में वित्तीय कार्रवाई की जा सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में समय पर राहत राशि उपलब्ध कराना और पुनर्निर्माण कार्यों को गति देना बेहद आवश्यक है। सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रभावित लोगों को राहत देने के साथ-साथ प्रदेश के बुनियादी ढांचे को दोबारा मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशासन का कहना है कि सभी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करें। पुनर्निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा भी की जाएगी ताकि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र तक सहायता समय पर पहुंच सके।
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