संसद में कांगड़ा-चंबा की भूकंप सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र ने दी जानकारी
संसद में कांगड़ा-चंबा की भूकंप सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र ने दी जानकारी

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 22, 2026 5:47 p.m. 125

हमीरपुर से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, चंबा और धर्मशाला क्षेत्र की भूकंप सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संवेदनशील क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा, आधारभूत ढांचे की मजबूती और भविष्य में संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी मांगी। संसद में इस विषय पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है और यहां निरंतर वैज्ञानिक निगरानी रखी जा रही है। इस दौरान अनुराग ठाकुर, भूकंप, कांगड़ा, एनडीएमए, हिमाचल प्रदेश जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। सरकार ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक संसाधनों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

सीस्मिक जोन-5 में आता है कांगड़ा-चंबा क्षेत्र

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि कांगड़ा, चंबा और धर्मशाला क्षेत्र देश के सबसे अधिक भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। यह इलाका सीस्मिक जोन-5 में आता है, जहां भविष्य में अधिक तीव्रता वाले भूकंप आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा समय-समय पर किए गए अध्ययनों में भी इस क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है। सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र चौबीसों घंटे पूरे देश में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करता है। आधुनिक उपकरणों और निगरानी तंत्र के माध्यम से किसी भी हलचल का रिकॉर्ड रखा जाता है, जिससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। हाल के महीनों में भी इस क्षेत्र में कई हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए, जिनकी लगातार निगरानी की गई।

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निगरानी केंद्रों और आपदा तैयारियों को किया जा रहा मजबूत

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में बड़ी संख्या में भूकंपीय निगरानी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में भी विभिन्न स्थानों पर स्थापित निगरानी केंद्र वास्तविक समय में भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे का शीघ्र आकलन किया जा सके। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राज्य सरकारों के सहयोग से नियमित मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जन-जागरूकता अभियान और आपदा प्रबंधन योजनाओं का संचालन कर रहा है। इसके साथ ही भूकंपरोधी भवन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता और भारतीय मानकों के अनुरूप दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहयोग के माध्यम से राज्यों की आपदा से निपटने की क्षमता को लगातार मजबूत बना रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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