Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर जिले के नादौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला हड़ेटा गांव आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस क्षेत्र में लगभग चार करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक ईको-टूरिज्म पार्क का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। घने चीड़ के जंगलों, शांत वातावरण और हरियाली से घिरी पहाड़ियों के बीच विकसित हो रहा यह पार्क न केवल पर्यटकों को प्रकृति के करीब समय बिताने का अवसर देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी सोच के तहत हड़ेटा में विकसित किया जा रहा यह पार्क भविष्य में हमीरपुर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।
हड़ेटा गांव नादौन-सलौणी-दियोटसिद्ध मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित है। चारों ओर फैले चीड़ के घने जंगल, स्वच्छ वातावरण और शांत पहाड़ियां इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद आकर्षक बनाती हैं। अब इसी खूबसूरती को पर्यटन से जोड़ने के उद्देश्य से यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त पार्क तैयार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कम चर्चित लेकिन प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों का विकास आवश्यक है। इसी उद्देश्य से Eco Tourism Park परियोजना को प्राथमिकता दी गई है।
यह पार्क लगभग 125 कनाल भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसका निर्माण आर्थिक विकास एवं आजीविका सृजन परियोजना (नवजीवन) के तहत ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वन विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जनवरी 2025 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। वर्तमान में निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है और अधिकांश कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह परियोजना केवल पर्यटन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
निर्माणाधीन पार्क में पर्यटकों की सुविधा और आराम को ध्यान में रखते हुए कई आकर्षक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। पार्क में सुंदर कॉटेज, आधुनिक कैफेटेरिया, योग स्थल, बच्चों के खेलने के लिए पार्क, वॉकिंग ट्रेल्स, वॉच टॉवर, प्राकृतिक वातावरण से मेल खाते आकर्षक ढांचे और बैठने के लिए विशेष स्थान तैयार किए जा रहे हैं। इन सभी सुविधाओं का उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के बीच शांत, सुरक्षित और यादगार अनुभव उपलब्ध कराना है। भविष्य में यह स्थान परिवारों, प्रकृति प्रेमियों और धार्मिक यात्रियों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय लोगों की आजीविका को विशेष महत्व दिया गया है। पार्क में बनाए जा रहे कॉटेज और कैफेटेरिया का संचालन स्थानीय निवासियों द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा दुकानों का निर्माण भी किया गया है, जहां स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री की जाएगी। इससे गांव के युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को स्थायी आय का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और पलायन को कम करना भी है।
हड़ेटा का भौगोलिक स्थान इस परियोजना को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। यह क्षेत्र ज्वालामुखी, नादौन और दियोटसिद्ध जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित है। ऐसे में यहां विकसित हो रहा पार्क धार्मिक यात्रियों के लिए भी विश्राम और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने का उत्कृष्ट केंद्र बन सकता है। इससे Hamirpur Tourism को नई पहचान मिलने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह पार्क जिले के पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और प्राकृतिक क्षेत्रों को भी पर्यटन से जोड़ना है। इसी सोच के तहत विकसित हो रही यह परियोजना Himachal Tourism के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि इस प्रकार की परियोजनाएं अन्य जिलों में भी विकसित होती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पार्क का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है और शेष कार्य भी तेजी से अंतिम चरण में है। निर्माण पूरा होते ही इसका लोकार्पण किया जाएगा, जिसके बाद पर्यटकों के लिए इसे औपचारिक रूप से खोल दिया जाएगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पार्क शुरू होने के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह परियोजना न केवल पर्यटन बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
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