Post by : Khushi Joshi
मंडी। प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने वर्षों पहले डिपो संचालकों को POSH मशीनें उपलब्ध तो करवा दीं, लेकिन इन मशीनों को चलाने के लिए आवश्यक इंटरनेट सुविधा आज तक नहीं दी गई। नतीजा यह है कि डिपो संचालक मजबूरी में अपनी निजी जेब से इंटरनेट खर्च उठाकर सिस्टम को चलाए हुए हैं। पांच साल पहले विभाग की ओर से POS मशीनों में डाली गई सिम सेवाएं बंद हो चुकी हैं और आज तक इन्हें पुनः सक्रिय नहीं किया गया, जबकि इस मुद्दे पर सचिव, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। हर महीने लगभग 470 रुपये अतिरिक्त खर्च डिपो संचालकों की जेब से जा रहा है, ऐसे में संचालकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रदेश डिपो संचालक समिति के अध्यक्ष अशोक कवि का कहना है कि विभागीय अधिकारी न केवल सचिव के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि डिपो संचालकों की परेशानियों को समझने की भी कोशिश नहीं कर रहे। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को हमीरपुर में यूनियन की स्थापना दिवस बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया था, जिसके बाद प्रदेशभर में एक दिन के लिए डिपो बंद भी रखे गए थे। उस समय खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था कि एक माह के भीतर सभी डिपो में नेट सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी, लेकिन छह महीने बीत जाने पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यूनियन अध्यक्ष का कहना है कि यह देरी सिर्फ़ तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि डिपो संचालकों के साथ हो रहा सीधा अन्याय है, जबकि सरकार चुनावों के दौरान इन्हीं संचालकों से बेहतर कार्य और तेज़ व्यवस्था की उम्मीद रखती है।
आक्रोशित संचालकों ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस सरकार ने वादा किया था कि सभी डिपो संचालकों को 20,000 रुपये मासिक वेतन और वन-टाइम लाइसेंस सुविधा दी जाएगी, ताकि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित रहकर जनता को ration वितरण की सेवाएं दे सकें। लेकिन सरकार के तीन साल बीत चुके हैं और वादा अबतक कागज़ों से बाहर नहीं आया। लगातार निजी इंटरनेट खर्च, तकनीकी दिक्कतों और सरकारी उदासीनता के बीच संचालक मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना कर रहे हैं। कई डिपो संचालकों ने संकेत दिया है कि यदि समय रहते समस्याओं का हल नहीं किया गया तो वे depots छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे, जिससे ग्रामीण व दूर-दराज़ क्षेत्रों में राशन वितरण ठप होने की आशंका खड़ी हो सकती है।
डिपो संचालक समिति का साफ कहना है कि अगर विभाग POS मशीनें देना चाहता है, तो इंटरनेट सुविधा भी उसी की जिम्मेदारी है। सरकार और विभाग दोनों को चाहिए कि संचालकों की समस्याओं को तुरंत प्राथमिकता में रखते हुए समाधान निकाला जाए, क्योंकि डिपो जनता और सरकार के बीच सीधा संपर्क बिंदु हैं। उनकी मुश्किलें बढ़ने का असर सीधा आम परिवारों तक पहुंचेगा।
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