Post by : Himachal Bureau
शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाग में हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद की ओर से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के तत्वावधान में एक दिवसीय उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को दूरसंचार सेवाओं, उपभोक्ता अधिकारों, डिजिटल सुरक्षा तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर दूरसंचार सेवाओं से जुड़े अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला नियंत्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के पूर्व अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने की। परिषद के प्रतिनिधि उमजीत सिंह मान ने उपस्थित विद्यार्थियों और नागरिकों को Consumer Rights, Telecom Services, TRAI, Mobile Network तथा Call Drop से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से दीं। उन्होंने कहा कि किसी भी मोबाइल या इंटरनेट सेवा का लाभ लेने से पहले उपभोक्ताओं को उसके नियम, शर्तें, शुल्क और सेवा की गुणवत्ता की पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। कई बार बिना जानकारी के प्लान लेने से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क, गलत बिलिंग या छिपे हुए चार्ज का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक उपभोक्ता को अपने बिल की नियमित जांच करनी चाहिए और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित सेवा प्रदाता से तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पोस्टपेड और प्रीपेड मोबाइल सेवाओं की बिलिंग प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। प्रतिभागियों को बताया गया कि अनपेक्षित कटौती, अतिरिक्त शुल्क या गलत बिल आने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया क्या होती है। साथ ही प्रसारण सेवाओं में उपलब्ध चैनलों के चयन, चैनल बुके, शुल्क निर्धारण और उपभोक्ता के अधिकारों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई ताकि लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार सेवाओं का चयन कर सकें और अनावश्यक खर्च से बच सकें।
कार्यक्रम में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए Cyber Security, Digital Safety, Online Fraud, OTP Scam तथा Cyber Crime जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करने के लिए मजबूत पासवर्ड रखना, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करना और समय-समय पर पासवर्ड बदलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, एटीएम विवरण, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। सोशल मीडिया, ईमेल या मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध लिंक और आकर्षक ऑफर वाले संदेशों से सावधान रहना भी जरूरी है, क्योंकि ऐसे माध्यमों से साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की डीएनडी सेवा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अनचाही कॉल और स्पैम संदेशों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा संदिग्ध मोबाइल नंबरों की रिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी विस्तार से समझाई गई। उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को बिलिंग, नेटवर्क या अन्य सेवा संबंधी समस्या आती है तो सबसे पहले संबंधित कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र या नोडल अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। निर्धारित समय के भीतर समाधान नहीं मिलने पर उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। वहीं वित्तीय या साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता विषय पर आधारित संदेश और प्रस्तुतियां भी दीं। विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती दीपशिखा गौर ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर परिषद की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सीखी गई जानकारियों को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।
मुख्य अतिथि सुरेंद्र शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक नागरिक को खरीदारी करते समय सतर्क रहना चाहिए और किसी भी सेवा या उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, जिम्मेदार नागरिक बनने और समाज व देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया।
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कार्यक्रम के अंतिम सत्र में खुले संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने मोबाइल नेटवर्क, कॉल ड्रॉप, इंटरनेट सेवाओं, डिजिटल सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े कई सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों के उत्तर देते हुए उचित मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अवसर पर मोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधि, विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी तथा स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम का लाभ उठाया। इस तरह का जागरूकता अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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