लद्दाख में CSIR-IHBT पालमपुर ने स्थापित किया देश का सबसे बड़ा लिलियम पुष्प उद्यान
लद्दाख में CSIR-IHBT पालमपुर ने स्थापित किया देश का सबसे बड़ा लिलियम पुष्प उद्यान

Author : Rajesh Vyas

Sept. 18, 2026 10:41 a.m. 124

लेह, 17 सितंबर 2026: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT) ने लद्दाख के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान ने कृषि विभाग, लेह के सहयोग से चोगलमसर और स्तकना में देश का सबसे बड़ा लिलियम पुष्प उद्यान एवं पुष्प क्षेत्र स्थापित किया है। करीब 40 एकड़ में फैले इन दोनों पुष्प क्षेत्रों में 25 लाख से अधिक उच्च-मूल्य वाले फूल लगाए गए हैं। इनमें लगभग 24 लाख लिलियम और एक लाख ग्लैडियोलस के पौधे शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में व्यावसायिक पुष्पकृषि की संभावनाओं को बढ़ाना, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और किसानों के लिए आय के नए स्रोत तैयार करना है।

उपराज्यपाल ने किया पुष्प उद्यानों का उद्घाटन

चोगलमसर और स्तकना में स्थापित इन पुष्प उद्यानों का उद्घाटन 17 सितंबर को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। इस अवसर पर CSIR-IHBT के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव भी मौजूद रहे। यह उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर किया गया। संस्थान के अनुसार, ऊंचाई वाले लद्दाख क्षेत्र में उच्च-मूल्यीय पुष्पकृषि को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है।

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केवल दो महीने में तैयार हुआ 40 एकड़ का पुष्प क्षेत्र

इस परियोजना की एक खास बात यह है कि दोनों पुष्प क्षेत्रों को करीब दो महीने की अवधि में विकसित किया गया। चुनौतीपूर्ण कृषि-जलवायु परिस्थितियों वाले लद्दाख में इतने बड़े स्तर पर लिलियम और ग्लैडियोलस की खेती के लिए वैज्ञानिक तकनीक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया। CSIR-IHBT ने परियोजना में पुष्पकृषि से जुड़ी अपनी तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई। संस्थान के अनुसार, यह पहल इस बात की संभावनाओं को सामने रखती है कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में भी उच्च-मूल्य वाले फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।

किसानों की आय और युवाओं के लिए नए अवसरों पर जोर

CSIR-IHBT के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि चोगलमसर और स्तकना में स्थापित लिलियम पुष्प उद्यान लद्दाख में उच्च-ऊंचाई वाली पुष्पकृषि को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग, लेह के साथ मिलकर संस्थान विज्ञान आधारित पुष्पकृषि तकनीकों की क्षमता को प्रदर्शित करना चाहता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए उद्यमिता और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये पुष्प उद्यान केवल व्यावसायिक फूल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे। इन्हें किसान प्रशिक्षण, तकनीकी प्रदर्शन और प्रौद्योगिकी प्रसार के केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना है।

किसान प्रशिक्षण और पुष्प आधारित उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

चोगलमसर और स्तकना के पुष्प क्षेत्रों में स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से परिचित कराने पर भी जोर दिया जाएगा। आधुनिक कृषि तकनीकों को स्थानीय कृषि ज्ञान के साथ जोड़कर किसानों और युवा उद्यमियों को व्यावसायिक पुष्पकृषि की संभावनाओं से अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा मूल्य संवर्धन और फूलों से जुड़े विभिन्न व्यवसायों के लिए भी संभावनाएं तलाशने की योजना है। इससे कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त विकल्प विकसित हो सकते हैं।

लद्दाख में कृषि-पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा

इन विशाल पुष्प क्षेत्रों से लद्दाख में कृषि-पर्यटन के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है। फूलों से सजे बड़े क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, छोटे कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सकता है। चोगलमसर और स्तकना के पुष्प क्षेत्र कृषि उत्पादन को पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता से जोड़ने का उदाहरण भी बन सकते हैं। इससे लद्दाख में पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ नए आर्थिक अवसर विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।

हिमालयी क्षेत्रों में वैज्ञानिक पुष्पकृषि की दिशा में पहल

CSIR-IHBT पालमपुर और कृषि विभाग, लेह के बीच यह सहयोग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विज्ञान एवं तकनीक आधारित कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। संस्थान के अनुसार, परियोजना का व्यापक उद्देश्य लद्दाख में उच्च-मूल्यीय पुष्पकृषि का विस्तार करना और किसानों, युवाओं तथा स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार करना है। साथ ही जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की तकनीकों को बढ़ावा देकर हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि और आजीविका विकास को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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