Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में राजस्थान पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो करीब चार दशक से अधिक समय पहले दर्ज धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की तलाश में था। 69 वर्षीय विजय कुमार यादव को नाहन के चौगान मैदान से पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से यहां रह रहा था और स्थानीय स्तर पर खेल प्रशिक्षक के रूप में उसकी पहचान बन चुकी थी। राजस्थान के उदयपुर में दर्ज इस मामले में आरोपी पर बेरोजगार लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे लेने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 1984 में मामला दर्ज होने के बाद से विजय कुमार यादव फरार चल रहा था। बाद में उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया था। इस गिरफ्तारी की खास बात यह रही कि पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए अलग तरीका अपनाया। राजस्थान से आई टीम ने नाहन के चौगान मैदान में खिलाड़ी बनकर प्रवेश किया और कोच से बातचीत शुरू की। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
उदयपुर पुलिस आरोपी की तलाश में नाहन पहुंची थी। जानकारी के अनुसार, पुलिस को पता चला था कि विजय कुमार यादव चौगान मैदान में खेल गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद टीम ने ऐसी रणनीति बनाई, जिससे आरोपी को संदेह न हो। पुलिसकर्मी खिलाड़ियों के रूप में मैदान में पहुंचे और कोच से मदद लेने के बहाने बातचीत की। इस दौरान उसकी पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय पुलिस का सहयोग भी लिया गया। सिरमौर के पुलिस अधीक्षक एनएस नेगी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्थान पुलिस ने स्थानीय पुलिस की सहायता से पुराने मामले में वांछित आरोपी को पकड़ा है।
इस मामले की शुरुआत 5 मार्च 1984 को हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भंवर सिंह नामक व्यक्ति ने राजस्थान के उदयपुर स्थित धनमंडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में विजय कुमार यादव और उसके साथियों पर कथित तौर पर ‘किनारा ग्रुप’ और ‘अग्रवाल सेल्स’ के नाम से संस्थाएं चलाने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि इन संस्थाओं के माध्यम से लोगों को केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त होने का भरोसा दिलाया जाता था। शिकायत के मुताबिक, बेरोजगार लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया गया और प्रत्येक व्यक्ति से 3,000 रुपये लिए गए। आरोप है कि इस तरीके से लगभग 32,000 रुपये एकत्र किए गए। इसके बाद कार्यालय बंद कर दिया गया और संबंधित लोग वहां से चले गए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। उस समय कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन विजय कुमार यादव पुलिस की पकड़ में नहीं आया। इसके बाद उसकी तलाश जारी रही और उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये विवरण शिकायत और पुलिस कार्रवाई से संबंधित हैं। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के तहत होगा।
जानकारी के अनुसार, विजय कुमार यादव मूल रूप से हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ गांव का रहने वाला है। बताया जाता है कि वह अलग-अलग स्थानों पर रहा और खेल प्रशिक्षण से जुड़े काम करता रहा। बाद में उसने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में अपना ठिकाना बना लिया। समय के साथ स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एक खेल प्रशिक्षक के रूप में स्थापित हो गई। वह जवाहर नवोदय विद्यालय में फुटबॉल कोच के तौर पर सेवाएं देने के बाद वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुआ था। सेवानिवृत्ति के बाद भी खेलों से उसका जुड़ाव बना रहा। जानकारी के मुताबिक, वह स्थानीय क्लबों के साथ एथलेटिक्स प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ था और चौगान मैदान में उसकी नियमित गतिविधियां थीं। पुलिस की जांच के दौरान उसके पुराने रिकॉर्ड और पुश्तैनी दस्तावेजों में बदलाव करवाने की कोशिश से संबंधित जानकारी का भी उल्लेख सामने आया है। हालांकि, इस पहलू से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए।
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चार दशक से अधिक पुराने मामले में आरोपी तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं था। समय बीतने के साथ व्यक्ति का निवास स्थान और गतिविधियां बदल सकती हैं, जिससे पुराने मामलों की जांच जटिल हो जाती है। धनमंडी थाना पुलिस के अनुसार, विजय कुमार यादव का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच के साथ-साथ पारंपरिक पुलिस पड़ताल भी की गई। उसके पैतृक गांव रूपगढ़ में पारिवारिक संपर्कों से जुड़ी जानकारियां जुटाई गईं। इन सुरागों से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसके बाद राजस्थान पुलिस की टीम नाहन पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी की पहचान सुनिश्चित कर गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की। यह कार्रवाई दर्शाती है कि पुराने मामलों में भी रिकॉर्ड, संपर्कों और विभिन्न स्थानों से जुटाई गई जानकारियां जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से इस्तेमाल किए गए प्रत्येक तकनीकी तरीके का विस्तृत विवरण सार्वजनिक जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
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