मंडी की आरती ने स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी, थुनाग में कैंटीन चलाकर कमा रहीं 15 हजार रुपये
मंडी की आरती ने स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी, थुनाग में कैंटीन चलाकर कमा रहीं 15 हजार रुपये

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Oct. 21, 2026 10:50 a.m. 109

मंडी, 21 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र की ग्राम पंचायत उड़ीधार की आरती कुमारी इसका उदाहरण हैं। सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चलाने का अवसर हासिल किया। वर्ष 2024 से एक अन्य महिला के साथ कैंटीन का संचालन कर रहीं आरती अब हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें परिवार की आर्थिक जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों में सहयोग करने में मदद मिल रही है। आरती की यह पहल बताती है कि सही अवसर और आर्थिक सहायता मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने स्तर पर रोजगार शुरू कर सकती हैं और परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मिले ऋण और स्वयं सहायता समूह को प्राप्त वित्तीय सहयोग ने भी उनकी इस यात्रा में भूमिका निभाई है।

स्वयं सहायता समूह से मिला कैंटीन चलाने का अवसर

आरती कुमारी मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र की ग्राम पंचायत उड़ीधार की निवासी हैं। वह सरस्वती स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह के माध्यम से उन्हें थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चलाने का अवसर मिला। वर्ष 2024 से वह एक अन्य महिला के साथ मिलकर इस कैंटीन का संचालन कर रही हैं। इस काम से दोनों महिलाओं को रोजगार मिला है और नियमित आय अर्जित करने का साधन उपलब्ध हुआ है। कैंटीन के संचालन के जरिए आरती अपने काम की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी योगदान दे रही हैं।

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हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आय

आरती के अनुसार, कैंटीन से उन्हें हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय हो जाती है। इस आमदनी से वह घर के खर्चों में सहयोग करती हैं और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में भी योगदान देती हैं। स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उनके पास आय का एक नियमित साधन उपलब्ध हुआ है। इससे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने में मदद मिल रही है। आरती की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए उपलब्ध स्वरोजगार के अवसरों की अहमियत को भी सामने लाती है।

एनआरएलएम के तहत मिला दो लाख रुपये का ऋण

आरती कुमारी ने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत दो लाख रुपये का ऋण मिला है, जिस पर चार प्रतिशत ब्याज दर लागू है। इसके अलावा, उनके स्वयं सहायता समूह को केंद्र सरकार की ओर से 15 हजार रुपये और प्रदेश सरकार की ओर से 25 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि भी मिली है। समूहों को मिलने वाली ऐसी वित्तीय सहायता महिलाओं को रोजगार से जुड़ी गतिविधियां शुरू करने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। आरती ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे वे अपनी आजीविका चलाने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी भूमिका निभा रही हैं।

मंडी जिले में 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित

मंडी जिले में स्वयं सहायता समूहों का बड़ा नेटवर्क ग्रामीण महिलाओं को सामूहिक रूप से आजीविका गतिविधियों से जोड़ रहा है। उपायुक्त अपूर्व देवगन के अनुसार, जिले के 14 विकास खंडों में कुल 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 63,968 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। जिले में 727 ग्राम संगठन और 48 क्लस्टर स्तरीय संघ भी कार्यरत हैं। उपायुक्त ने बताया कि 7,744 स्वयं सहायता समूहों और 662 ग्राम संगठनों की मैपिंग की जा चुकी है।

महिलाओं की आर्थिक मजबूती में अहम भूमिका

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक प्रयासों से आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं। आरती कुमारी की कहानी इसी दिशा में एक उदाहरण है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने, कैंटीन संचालन का अवसर मिलने और वित्तीय सहायता हासिल करने से उन्हें अपनी आय अर्जित करने का रास्ता मिला। ऐसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर सकते हैं।

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