नालागढ़ में बुजुर्ग दंपति को 2 दिन डिजिटल अरेस्ट, ₹72.10 लाख ठगे
नालागढ़ में बुजुर्ग दंपति को 2 दिन डिजिटल अरेस्ट, ₹72.10 लाख ठगे

Post by : Himachal Bureau

Sept. 9, 2026 11:54 a.m. 123

बीबीएन, 9 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने खुद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपति को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब दो दिन तक डर और दबाव में रखा। इसके बाद उनसे ₹72.10 लाख की रकम ट्रांसफर करवा ली गई।

NIA अधिकारी बनकर किया फोन

जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर को बुजुर्ग दंपति को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर अपनी पहचान NIA अधिकारी के रूप में बताई। ठगों ने दंपति को बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल बैंक से जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियों में हुआ है और वे जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इसके बाद उन्हें मामले से बाहर निकालने का भरोसा देते हुए ठगों के निर्देशों का पालन करने को कहा गया। दंपति को यह भी निर्देश दिया गया कि वे इस मामले की जानकारी किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित को न दें।

करीब दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट का दावा

आरोप है कि साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को करीब दो दिन तक उनके घर से ही डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने संपर्क में रखा। लगातार डर और दबाव के बीच दंपति से बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और आधार कार्ड व पैन कार्ड जैसे दस्तावेज साझा करवाए गए। इसके बाद ठगों ने कथित तौर पर दंपति को सुरक्षा राशि के नाम पर ₹72 लाख 10 हजार जमा करने के लिए कहा।

बैंक मैनेजर ने किया सावधान, फिर भी ट्रांसफर हुई रकम

जब दंपति अपनी एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे तो बैंक प्रबंधक को लेन-देन पर संदेह हुआ। बैंक मैनेजर ने उन्हें साइबर ठगी की आशंका बताते हुए रकम ट्रांसफर न करने की सलाह दी। हालांकि, डिजिटल अरेस्ट के डर और ठगों के दबाव में दंपति ने कथित तौर पर बैंक मैनेजर की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया और ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने दंपति से ऐसा आवेदन भी लिखवाया, जिसमें उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का हवाला दिया गया था।

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WhatsApp ग्रुप में मैसेज से खुला मामला

रकम ट्रांसफर करने के बाद भी दंपति ने शुरुआत में इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। मामले का खुलासा तब हुआ, जब ठगों को भेजे जाने वाले कुछ दस्तावेज गलती से नालागढ़ के एक पेंशनर्स WhatsApp ग्रुप में फॉरवर्ड हो गए। ग्रुप में मौजूद लोगों ने जब इन दस्तावेजों को देखा तो उन्होंने दंपति से संपर्क किया। बातचीत के बाद उन्हें साइबर ठगी का शिकार होने की जानकारी सामने आई।

जांच साइबर सेल शिमला को सौंपी

मामले की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित दंपति ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अधीक्षक बद्दी विनोद धीमान ने घटना की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता और ठगी गई बड़ी रकम को देखते हुए इसकी आगामी तकनीकी जांच साइबर सेल शिमला को सौंप दी गई है। पुलिस मामले से जुड़े बैंक खातों, दस्तावेजों, कॉल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी में जालसाज अक्सर खुद को पुलिस, NIA, CBI या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं। किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए तो बिना सत्यापन के कोई भुगतान नहीं करना चाहिए। मामले में पुलिस की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही ठगी से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।

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